बरेली जल जीवन मिशन हादसा: जलशक्ति मंत्री का कड़ा प्रहार, 2 इंजीनियर बर्खास्त, निर्माण एजेंसी पर FIR और ब्लैकलिस्टिंग की तैयारी

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के बरेली में जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी के गिरने की घटना ने शासन स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार की बू आने पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मंत्री के निर्देश पर न केवल संबंधित इंजीनियरों पर गाज गिरी है, बल्कि निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर उसे काली सूची (ब्लैकलिस्ट) में डालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

इंजीनियरों पर गिरी गाज: बर्खास्तगी और सस्पेंशन

हादसे की गंभीरता को देखते हुए जलशक्ति विभाग ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के असिस्टेंट इंजीनियर (AE) और जूनियर इंजीनियर (JE) की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। इसके साथ ही जल निगम ग्रामीण के संबंधित जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है। कार्रवाई यहीं नहीं रुकी; जल निगम ग्रामीण के असिस्टेंट इंजीनियर के विरुद्ध विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं, जबकि अधिशासी अभियंता (EE) को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता में किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एजेंसी एनसीसी लिमिटेड पर एफआईआर और भारी जुर्माना

इस पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी निभा रही निर्माणदायी संस्था एनसीसी (NCC) लिमिटेड के खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन (TPI) की जिम्मेदारी संभालने वाली कंपनी बीएलजी (BLG) के बरेली स्थित सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हटा दिया गया है। निगरानी में विफल रहने के कारण बीएलजी कंपनी पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। सरकार ने दोनों ही संस्थाओं (NCC और BLG) को ब्लैकलिस्ट करने का नोटिस जारी कर दिया है, जिससे भविष्य में ये कंपनियां किसी भी सरकारी प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन पाएंगी।

24 घंटे में आएगी टीएसी की रिपोर्ट

हादसे के तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए एक टेक्निकल ऑडिट कमेटी (TAC) का गठन किया गया है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने निर्देश दिए हैं कि यह कमेटी 24 घंटे के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपे। इस रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि टंकी के डिजाइन में खामी थी या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता खराब थी। मंत्री ने स्पष्ट कहा है कि टीएसी की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा लापरवाही न हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *