आज है एकदंत संकष्टी चतुर्थी, जानें चंद्रमा को बिना अर्घ्य के यह व्रत क्यों माना जाता है अधूरा?

KNEWS DESK- हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है और हर शुभ कार्य की शुरुआत उनकी आराधना से होती है। गणेश जी को समर्पित संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व है। पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि 5 मई 2026 को सुबह 5:24 बजे से प्रारंभ होकर 6 मई 2026 को सुबह 7:51 बजे तक रहेगी। चूंकि चंद्रोदय के समय यह तिथि 5 मई को विद्यमान रहेगी, इसलिए व्रत आज ही रखा जा रहा है।

अंगारकी चतुर्थी का बना दुर्लभ संयोग
इस बार संकष्टी चतुर्थी मंगलवार को पड़ रही है, जिसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है। यह संयोग अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से विशेष रूप से मंगल दोष कम होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देना क्यों है अनिवार्य?
संकष्टी चतुर्थी व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम चंद्रमा को अर्घ्य देना है। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार चंद्रमा ने भगवान गणेश के स्वरूप का उपहास किया था, जिससे क्रोधित होकर गणेश जी ने उसे श्राप दिया। बाद में चंद्रमा के क्षमा मांगने पर गणेश जी ने कहा कि चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके सभी संकट दूर होंगे। इसी वजह से इस दिन चंद्र दर्शन और अर्घ्य देना व्रत का आवश्यक हिस्सा माना जाता है।

बिना अर्घ्य के व्रत क्यों माना जाता है अधूरा?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिनभर उपवास रखने के बाद व्रत का समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही होता है। यदि कोई व्यक्ति बिना अर्घ्य दिए व्रत खोलता है, तो उसे व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। अर्घ्य देने का अर्थ है जल, दूध या गंगाजल से चंद्रमा का पूजन करना और उनसे सुख-शांति की प्रार्थना करना।

संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि
सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखें। शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा के दर्शन करें, उन्हें अर्घ्य दें और मंत्रों का जाप करें। इसके बाद गणेश जी की आरती कर व्रत का पारण करें।

इस व्रत से मिलने वाले फल
मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी व्रत करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। यह व्रत बुद्धि, विवेक और समृद्धि प्रदान करता है। साथ ही, संतान प्राप्ति, करियर में सफलता और आर्थिक समस्याओं से राहत दिलाने वाला माना जाता है।

भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है यह व्रत
अंगारकी संकष्टी चतुर्थी भक्तों के लिए विशेष अवसर लेकर आती है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है।

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