केरल में कांग्रेस की बड़ी वापसी: 10 साल बाद सत्ता में लौटकर बनाया नया रिकॉर्ड

Knews Desk-केरल विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सत्ता में वापसी की है। करीब 140 सीटों वाली विधानसभा में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को लगभग 90 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, जो एक निर्णायक जीत का संकेत है। इस जीत के साथ कांग्रेस ने न सिर्फ 10 साल बाद केरल में सरकार बनाने का रास्ता साफ किया है, बल्कि 7 साल बाद देश में अपने मुख्यमंत्रियों की संख्या भी चार तक पहुंचा दी है।

कांग्रेस की जीत के पीछे क्या रहे बड़े कारण?

केरल में कांग्रेस की वापसी के पीछे कई रणनीतिक और राजनीतिक कारण रहे। सबसे पहला और अहम कारण रहा गठबंधन को मजबूत करना। कांग्रेस ने चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर छोटी पार्टियों को अपने साथ जोड़ा, जिससे वोटों का बंटवारा रुका और एकजुट समर्थन मिला।

दूसरा बड़ा फैक्टर पार्टी के भीतर एकजुटता रहा। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान को शांत कर दिया गया। केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथल्ला और वीडी सतीशन जैसे बड़े नेता एक साथ प्रचार करते नजर आए, जिससे कार्यकर्ताओं और वोटरों में सकारात्मक संदेश गया।

ध्रुवीकरण और रणनीतिक प्रचार का असर

कांग्रेस ने चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के बढ़ते प्रभाव को मुद्दा बनाया। इसके चलते मुस्लिम और ईसाई समुदाय के वोटर कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होते दिखे। वहीं सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के खिलाफ भी माहौल बना।

इसके अलावा कांग्रेस ने नए चेहरों को मौका देकर और जमीनी स्तर पर डोर-टू-डोर कैंपेन चलाकर मतदाताओं तक सीधा संपर्क बनाया। युवा और शिक्षित वर्ग को साधने के लिए सचिन पायलट और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नेताओं को मैदान में उतारा गया।

रिकॉर्ड क्यों है खास?

2019 के बाद यह पहली बार है जब कांग्रेस के चार मुख्यमंत्री एक साथ सत्ता में होंगे। इससे पहले 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी। बाद के वर्षों में कई राज्यों में हार के कारण यह संख्या घटकर तीन रह गई थी।

अब 2026 में केरल की जीत के बाद हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के साथ कांग्रेस के पास चार राज्यों में सरकार होगी। यह पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

राजनीतिक महत्व और आगे की राह

केरल में यह जीत कांग्रेस के लिए सिर्फ एक राज्य की सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति में उसकी वापसी का संकेत भी देती है। खासतौर पर तब, जब प्रियंका गांधी और संगठन के बड़े नेता भी इस राज्य से जुड़े हुए हैं।

कुल मिलाकर, केरल में कांग्रेस की यह जीत रणनीति, एकजुटता और सही मुद्दों के चयन का परिणाम है। आने वाले समय में यह परिणाम पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।

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