ISRO का बड़ा प्लान: गगनयान में पहली बार 4 आम नागरिक होंगे शामिल!

Knews Desk-भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन और भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं को ध्यान में रखते हुए अंतरिक्ष यात्री चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। अंतरिक्ष यात्री चयन और प्रबंधन समिति ने सिफारिश की है कि दूसरे बैच में 10 अंतरिक्ष यात्रियों का एक नया समूह तैयार किया जाए, जिसमें पहली बार 4 आम नागरिकों (सिविलियंस) को भी शामिल किया जाएगा।

4 सिविलियन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन

इन 4 सिविलियन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) क्षेत्रों के विशेषज्ञों में से किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में अंतरिक्ष अभियानों में केवल सैन्य पायलट ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ भी सीधे अंतरिक्ष मिशनों का हिस्सा बन सकें। इस प्रस्तावित दल में कुल 10 अंतरिक्ष यात्री होंगे। इनमें से 6 मिशन पायलट भारतीय वायुसेना से लिए जाएंगे। इनकी पृष्ठभूमि मुख्य रूप से फाइटर जेट और कॉम्बैट एविएशन की होगी, जिसमें कुछ टेस्ट पायलट और संभवतः हेलिकॉप्टर पायलट भी शामिल हो सकते हैं।

गगनयान मिशन के पहला बैच

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ISRO अब केवल तकनीक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह नियमित मानव अंतरिक्ष उड़ानों, वैज्ञानिक प्रयोगों और भविष्य में प्रस्तावित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन के लिए एक स्थायी अंतरिक्ष यात्री दल तैयार कर रहा है। गौरतलब है कि गगनयान मिशन के पहले बैच में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल किए गए थे, जिनमें एयर कमोडोर प्रशांत नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, अजित कृष्णन और अंगद प्रताप का नाम शामिल है। ये सभी अनुभवी फाइटर और टेस्ट पायलट हैं, जिन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।

नई योजना के अनुसार, सिविलियन अंतरिक्ष यात्रियों को तुरंत शुरुआती गगनयान मिशनों में नहीं भेजा जाएगा। उन्हें पहले प्रशिक्षण और अनुभव दिया जाएगा और चौथे मानवयुक्त मिशन से उनकी उड़ान संभव होगी। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जहां शुरुआत में सैन्य प्रशिक्षित पायलटों को प्राथमिकता दी जाती है ताकि जोखिम को कम किया जा सके और मिशन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

ISRO का यह कदम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को और अधिक व्यापक और भविष्य-उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे न केवल वैज्ञानिक भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि भारत के अंतरिक्ष अभियानों में विविधता और विशेषज्ञता भी आएगी।

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