डिजिटल डेस्क- नई दिल्ली में चुनावी माहौल के बीच एक बयान ने सियासत को गरमा दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल किया। हालांकि, बयान सामने आते ही खड़गे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह विवादित टिप्पणी सामने आई। दरअसल, खड़गे विपक्षी गठबंधनों और दक्षिण भारत की राजनीति पर बोल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने AIADMK के संदर्भ में सवाल उठाते हुए कहा कि जो पार्टी अन्नादुरई की विचारधारा को मानती है, वह भाजपा के साथ कैसे जा सकती है। इसी क्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई।
खरगे का बयान बना राजनीतिक मुद्दा
खड़गे ने अपने बयान में कहा कि “उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती। उनके साथ जुड़ना लोकतंत्र को कमजोर करना है और अन्नादुरई, कामराज, पेरियार, कलैगनार और बाबा साहेब अंबेडकर जैसे नेताओं के विचारों के खिलाफ है।” उनके इस बयान को लेकर तुरंत सवाल उठने लगे और राजनीतिक विरोधियों ने इसे मुद्दा बना लिया। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे इस टिप्पणी को लेकर सवाल किया, तो खड़गे ने तुरंत सफाई दी। उन्होंने कहा, “नहीं, नहीं… मैंने प्रधानमंत्री को आतंकवादी नहीं कहा। मेरा मतलब था कि वह लोगों और राजनीतिक दलों को डराने-धमकाने का काम करते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), आयकर विभाग और CBI जैसी संस्थाओं का इस्तेमाल कर विपक्ष पर दबाव बनाया जा रहा है।
मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया गया- खरगे
खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार परिसीमन जैसे मुद्दों को भी अपने नियंत्रण में लेना चाहती है, जिससे लोकतांत्रिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने दोहराया कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और उनका आशय केवल राजनीतिक दबाव और डर के माहौल की ओर इशारा करना था। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है और इसे प्रधानमंत्री का अपमान बताया है। वहीं, कांग्रेस की ओर से लगातार यह कहा जा रहा है कि बयान को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है।