डिजिटल डेस्क- लोकसभा में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जोरदार जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इन बिलों का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना और देश में समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, न कि किसी राजनीतिक लाभ के लिए बदलाव करना, जैसा कि विपक्ष आरोप लगा रहा है। अमित शाह ने बताया कि इस बहस में 56 महिला सांसदों ने हिस्सा लिया और किसी ने भी महिला आरक्षण विधेयक का विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष, खासकर इंडिया गठबंधन, सीधे तौर पर बिल का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि सरकार का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव को महिला आरक्षण के तहत कराना है।
परिसीमन पर उठे सवालों का दिया जवाब
परिसीमन को लेकर उठे सवालों पर शाह ने कहा कि इसका विरोध वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के अधिकारों का विरोध है। उन्होंने बताया कि देश में 127 ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहां 20 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि कुछ सीटों पर यह संख्या 6 लाख के आसपास है। इससे “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के सिद्धांत का उल्लंघन होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में कहीं 45 लाख मतदाताओं पर एक सांसद है, तो कहीं मात्र 6 लाख मतदाताओं पर एक सांसद, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांत के खिलाफ है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 50 वर्षों तक देश को उचित परिसीमन से वंचित रखा, जिससे प्रतिनिधित्व में असमानता बनी रही।
संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता- अमति शाह
आरक्षण के मुद्दे पर अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की नीति स्पष्ट है धर्म के आधार पर न आरक्षण दिया जाएगा और न ही किसी को देने दिया जाएगा। तीनों विधेयकों के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए शाह ने कहा कि पहला लक्ष्य महिलाओं को सशक्त बनाना है, ताकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम समय पर लागू हो और 2029 का चुनाव इसके तहत कराया जा सके। दूसरा, संविधान के मूल सिद्धांत “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” को पूरी तरह लागू करना है।
मोदी सरकार ने 2026 की जनगणना जातिगत आधार पर कराने का लिया है निर्णय- अमित शाह
जाति जनगणना को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2026 की जनगणना जाति आधारित कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल जाति जनगणना को टालने के लिए नहीं लाया गया है। उत्तर और दक्षिण भारत के बीच भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए शाह ने कहा कि परिसीमन से किसी भी राज्य का नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों का संसद पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर भारत के राज्यों का है, और इस तरह के नैरेटिव देश को बांटने की कोशिश हैं।