उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट- उत्तराखंड राज्य अपने आध्यात्मिकता के साथ साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी भारत में प्रथम दर्जे की शिक्षा प्रणाली के लिए प्रसिद्ध रहा है, जिसके चलते कई बड़े चेहरों ने उत्तराखंड से अपनी शिक्षा-दीक्षा की शुरुआत कर प्रदेश का नाम ऊँचा किया है और वर्तमान में भी राज्य सरकार निरंतर शिक्षा प्रणाली में और अधिक सुधार करने के लिए कार्य भी कर रही है, लेकिन प्रदेश में जहाँ सरकारी स्कूल सरकार के संरक्षण में आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, वहीं निजी स्कूल प्रगति की राह पर स्कूली बच्चों के अभिभावकों की जेब काटते नज़र आ रहे है। देखा यह जा रहा है कि जहाँ स्कूली बच्चों के नए सत्र की शुरुआत हो रही है, वहीं निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बीते दिनों प्रदेश में बिकती महंगी किताबों के मुद्दों को देखा गया था, तो वहीं अब नये बढ़ती निजी स्कूलों की फीस के विषय ने मामले को गंभीर बना दिया है। यह मामला लम्बे समय से प्रदेश की सुर्खियों में भी बना हुआ है और इसी के चलते प्रदेश की राजनीति में भी इसका असर देखने को मिल रहा है। विपक्ष द्वारा इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हल्ला बोला गया है।
कांग्रेस महिला मोर्चा ने किया शिक्षा मंत्री आवास का घेराव
आपको बता दें, कांग्रेस महिला मोर्चा की द्वारा प्रदेश शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया गया, जिसके माध्यम से कांग्रेस महिला मोर्चा और तमाम कार्यकर्ताओं द्वारा स्कूलों की एडमिशन फीस और मंथली चार्ज से अभिभावकों पर बढ़ते बोझ के सम्बन्ध में तीन दिन पहले भारी आक्रोश जताया गया, साथ ही सरकार पर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम न लगाने का आरोप भी लगाया। वहीं बीते गुरुवार स्कूल में पढ़ने वाले बच्चो के अभिभावकों के साथ कांग्रेस पार्टी के विधायक प्रीतम सिंह द्वारा जिलाधिकारी के दफ्तर पहुंच कर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौपा गया, साथ ही स्कूल प्रबंधन को नियम अनुसार फीस निर्धारित किये जाने के सम्बन्ध में आग्रह भी किया गया। विपक्ष का लगातार मानना है कि हर वर्ष बिना उचित कारण के फीस बढ़ा दी जाती है, लेकिन सरकार प्रयाप्त नियंत्रण नही रख पा रही है। साथ ही विपक्ष का आरोप है कि सरकार प्राइवेट स्कूलों को लाभ पहुंचाने का कार्य कर रही है, जिसके कारण निजी स्कूलों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। कुल मिलाकर निजी स्कूलों की मनमानी, बढ़ती किताबों के दाम और अब बढ़ती फीस के इस विषय ने आम जनता के मन में आक्रोश के साथ साथ राजनितिक मुद्दे का रूप भी ले लिया है और जिसके चलते पक्ष विपक्ष के अपने अपने दावे और बयानबाज़ी भी देखने को मिल रही है।
उत्तराखंड बनता जा रहा शिक्षा माफियाओं का अड्डा
शिक्षा के क्षेत्र में प्रमुख स्थान रखने वाला उत्तराखंड शिक्षा माफियाओं का अड्डा बनता जा रहा है। हाल ही में छात्रों की किताबों से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसके बाद शिक्षा विभाग में भारी हड़कंप मच गया था। जिसको लेकर के न्यूज़ इण्डिया ने खबर को प्रमुखता से भी चलाया था। उसके बाद प्रशासन एक्शन मोड में आया और निजी किताब विक्रेताओं से कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब भी किया गया था। वहीं अब निजी स्कूलों की मनमानी के जरिये बढ़ती स्कूली बच्चो की फीस का मामला तूल पकड़ता दिखाई दे रहा है। बीते दिन निजी स्कूलों में मनमानी तरीके से फीस बढ़ोतरी के संबंध में कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह और कांग्रेस कार्यकर्ता अभिभावकों के साथ जिलाधिकारी के दफ्तर पहुंचे, जहां उन्होंने स्कूल प्रबंधन को नियम अनुसार फीस निर्धारित किए जाने के संबंध में जिलाधिकारी से आग्रह किया। इससे एक दिन पहले कांग्रेस महिला मोर्चा की और से शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत के घर का घेराव करते हुए कांग्रेसियों ने एडमिशन फीस और मंथली चार्ज से अभिभावकों पर बढ़ता बोझ और सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम न लगाने का आरोप लगाया है। कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए की सरकार प्राइवेट स्कूलों को लाभ पहुंचा रही है। जबकि आम अभिभावक परेशान है, पुलिस ने उन्हें आवास के पास जाने से रोका इस प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत को प्रति आत्मिक रूप में एक व्यक्ति को सामने बिठाकर उनसे स्कूल फीस और अन्य मुद्दों पर सवाल भी पूछे गए। विपक्षी दलों ने अभिभावकों की पीड़ा को समझते हुए मंत्री आवास का घेराव किया, साथ ही जिलाधिकारी से मिल ऐसे निजी स्कूलों पर कार्यवाही करने का आग्रह किया, और कार्यवाही नहीं करने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दे डाली।
बिना उचित कारणों के फीस बढ़ोतरी पर सरकार चुप
उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर लंबे समय से एक बड़ा विवाद बना हुआ है। जिसको लेकर अबकी बार विपक्ष को भी सरकार को घेरने के लिए मुद्दा मिल गया है. विपक्ष का आरोप है कि बिना उचित कारण के निजी स्कूलों द्वारा फीस बढ़ा दी जाती है और वर्तमान सरकार मूकदर्शक बनकर यह सब देख रही है और कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। विपक्ष का आरोप है कि ऐसे मनमानी कर रहे निजी स्कूलों को सरकार का ही संरक्षण प्राप्त है. साथ ही निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों को विशेष दुकानों से महंगी कॉपी – किताबें, यूनिफार्म खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे मध्यम वर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर असहनीय बोझ पड़ रहा है। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा कोई व्यापार नहीं, बल्कि समाज का मूल अधिकार है, लेकिन सामने आते इन प्रकरणों से कही न कही शिक्षा के क्षेत्र में ठेस पहुंच रही है, जिस पर तुरंत कार्यवाही की आवश्यकता भी है. वही सता पक्ष उक्त मामले में सफाई देता दिखाई दे रहा है।
शिक्षा बनती जा रही है राजनीति का विषय
शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान रखने वाले उत्तराखंड राज्य में दिन ब दिन कई मामले उजागर होते दिखाई दे रहे है. साथ ही अब निजी स्कूलों की मनमानी के कारण अभिभावकों की जेबों पर वार करते ज्वलंत विषयों के कारण प्रदेश की राजनीति में विपक्ष भी जमकर हल्ला बोल रहा है. मनमाने तरीके से पैसे वसूलने को लेकर बड़ा आक्रोश आम जनता के मन में सरकार और प्रशासन के खिलाफ बन चूका है, जो सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े कर रहा है, और राज्य की छवि को प्रभावित करता दिख रहा है. ऐसे में सरकार को विचार करने की आवश्यकता जरूर है, कि कौन वह लोग है जो शिक्षा को व्यापार बनाने में तुले हुए है, और क्यों राज्य धीरे धीरे शिक्षा माफियाओं का अड्डा भी बनता जा रहा है.