KNEWS DESK: अमेरिका के न्यूयॉर्क से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स और उसके पालतू मगरमच्छ के बीच का गहरा रिश्ता कानून के आगे टिक नहीं पाया। 66 वर्षीय टोनी कैवलारो पिछले करीब 30 सालों से ‘एल्बर्ट’ नाम के एक विशाल मगरमच्छ को पाल रहे थे। यह कोई आम पालतू जानवर नहीं था, बल्कि करीब 12 फीट लंबा और लगभग 750 पाउंड वजनी खतरनाक जीव था, जो उनके घर के अंदर बने स्विमिंग पूल में रहता था। टोनी का कहना था कि एल्बर्ट उनके लिए सिर्फ एक जानवर नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा था, जिसके साथ उन्होंने जीवन के कई साल बिताए और जो उनके लिए एक “इमोशनल सपोर्ट” यानी भावनात्मक सहारा भी बन गया था।

समस्या की शुरुआत साल 2021 में हुई, जब एल्बर्ट को रखने के लिए जरूरी परमिट समाप्त हो गया। इसके बाद मामला और गंभीर तब हो गया जब अधिकारियों को शिकायत मिली कि टोनी लोगों को मगरमच्छ के पास जाने की अनुमति दे रहे हैं और कुछ मामलों में उन्हें उसके साथ पूल में उतरने भी दे रहे हैं। नियमों के मुताबिक, इतने खतरनाक जंगली जानवर के साथ इस तरह का संपर्क न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा माना जाता है। यही वजह थी कि प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और जांच शुरू की गई।
अपने पालतू को बचाने के लिए टोनी कैवलारो ने करीब दो साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी
उनका तर्क था कि एल्बर्ट वर्षों से उनके साथ है, उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और वह पूरी तरह उनके नियंत्रण में है। उन्होंने अदालत में यह भी बताया कि एल्बर्ट उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन अदालत ने इस मामले को केवल भावनात्मक नजरिए से नहीं, बल्कि कानून और सुरक्षा के आधार पर देखा। अधिकारियों का मानना था कि इतना बड़ा और खतरनाक जानवर किसी भी समय नियंत्रण से बाहर हो सकता है, जिससे गंभीर हादसा हो सकता है।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला टोनी के खिलाफ
आखिरकार लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फैसला टोनी के खिलाफ गया और अधिकारियों ने एल्बर्ट को जब्त कर लिया। यह पल टोनी के लिए बेहद भावुक था, क्योंकि जिस जानवर को उन्होंने तीन दशकों तक अपने परिवार की तरह पाला, उससे उन्हें अलग होना पड़ा। इस घटना ने न सिर्फ टोनी को झकझोर दिया, बल्कि इस कहानी को जानने वाले कई लोग भी भावुक हो गए। यह मामला एक तरफ इंसान और जानवर के बीच गहरे रिश्ते को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट करता है कि कानून और सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों के आगे व्यक्तिगत भावनाएं हमेशा प्राथमिकता नहीं बन सकतीं।