झांसी स्टेशन पर उमा भारती की ट्रेन छूटने से बाल-बाल बची, चलती पंजाब मेल को रुकवाकर चढ़ीं पूर्व सीएम, रेल मंत्री को पत्र लिख उठाए सवाल

डिजिटल डेस्क- मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता उमा भारदती झांसी रेलवे स्टेशन पर एक बड़ी असुविधा का शिकार होते-होते बचीं। नई दिल्ली के लिए रवाना हो रही ‘पंजाब मेल’ ट्रेन उनके पहुंचने से पहले ही चल पड़ी, जिसके बाद किसी यात्री द्वारा चेन पुलिंग कर ट्रेन को रोका गया और वह किसी तरह उसमें सवार हो सकीं। इस घटना के बाद उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर रेलवे की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उमा भारती ने सोशल मीडिया पर इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने बताया कि वह निर्धारित समय से पहले ही झांसी रेलवे स्टेशन पहुंच गई थीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें ट्रेन पकड़ने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। उनका दावा है कि ट्रेन तय समय से पहले ही स्टेशन पर पहुंच गई और निर्धारित समय से करीब दो मिनट पहले ही रवाना भी हो गई।

रास्ते में कई बाधाओं के चलते हुई देर- उमा भारती

उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म नंबर 1 से प्लेटफॉर्म नंबर 4 तक पहुंचने के लिए उन्हें बैटरी से चलने वाली गाड़ी से ले जाया जा रहा था, क्योंकि वह तेज़ी से चल पाने में असमर्थ हैं। रास्ते में उन्हें कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। जिस ट्रैक को पार करना था, वहां काफी देर तक एक ट्रेन गुजरती रही, जिससे उन्हें इंतजार करना पड़ा। इसके बाद आगे बढ़ने पर उसी ट्रैक पर एक हाथगाड़ी फंसी मिली, जिसे हटाने में उनके सुरक्षाकर्मियों को समय लगा। जब तक वह प्लेटफॉर्म नंबर 4 पर पहुंचीं, तब तक ‘पंजाब मेल’ चलने लगी थी। उन्होंने कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि किसने चेन खींची, लेकिन उसी की वजह से ट्रेन रुकी और वह उसमें सवार हो सकीं। उन्होंने इस पूरे मामले में स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

रेलवे की आधुनिकीकरण में कमी का परिणाम- उमा भारती

उमा भारती ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि यह किसी एक व्यक्ति की गलती नहीं है, बल्कि रेलवे के आधुनिकीकरण में व्यावहारिक संवेदनशीलता की कमी का परिणाम है। उन्होंने कहा कि रेलवे में आधुनिक सुविधाएं तो जोड़ी जा रही हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यात्रियों की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि झांसी रेल मंडल के अधिकारी उनकी शारीरिक स्थिति से पहले से अवगत थे और उन्होंने बैटरी गाड़ी की व्यवस्था भी की थी, लेकिन इसके बावजूद समन्वय की कमी के कारण उन्हें परेशानी उठानी पड़ी। पूर्व मुख्यमंत्री ने इस घटना को आम यात्रियों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो आम लोग, बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाएं और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को कितनी दिक्कतें झेलनी पड़ती होंगी।

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