मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की एनर्जी कूटनीति तेज, यूएई में जयशंकर तो यूरोप मिशन पर विक्रम मिसरी

डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर बड़ी पहल शुरू कर दी है। इसी कड़ी में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी रविवार से फ्रांस और जर्मनी के तीन दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इससे पहले वह अमेरिका का अहम दौरा कर चुके हैं, जहां उन्होंने ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की थी। भारत की यह सक्रियता ऐसे समय देखने को मिल रही है, जब मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि हाल ही में ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच सीजफायर का ऐलान हुआ है, लेकिन क्षेत्र में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है। इस बीच इस्लामाबाद में युद्धविराम वार्ता को लेकर दोनों देशों के प्रतिनिधि भी बातचीत में जुटे हैं।

यूएई में उच्च स्तरीय वार्ता करेंगे विदेश मंत्री

इसी कूटनीतिक कवायद के तहत भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी संयुक्त अरब अमीरात पहुंच चुके हैं। वहां वह ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। यह पूरा प्रयास भारत के व्यापक “एनर्जी मिशन” का हिस्सा माना जा रहा है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी का फ्रांस दौरा खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां वह फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रियेंस के साथ ‘भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में रक्षा सहयोग, असैन्य परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, डिजिटल टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

फ्रांस के बाद जर्मनी दौरा करेंगे विदेश सचिव

फ्रांस के बाद मिसरी जर्मनी का दौरा करेंगे, जहां वह जर्मन विदेश कार्यालय के राज्य सचिव गेजा एंड्रियास वॉन गेयर के साथ ‘भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श’ की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस दौरान व्यापार और निवेश, हरित ऊर्जा, रक्षा और सुरक्षा, टेक्नोलॉजी, शिक्षा और विकास सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। भारत के लिए यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर मिडिल ईस्ट पर निर्भर है। अगर क्षेत्र में युद्ध लंबे समय तक चलता है, तो कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। ऐसे में भारत यूरोपीय देशों के साथ मिलकर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *