भाजपा पर ममता बनर्जी का तीखा वार, रैली में कहा—सांप पर भी भरोसा किया जा सकता है, लेकिन उन पर नहीं

डिजिटल डेस्क- ममता बनर्जी ने शुक्रवार को एक चुनावी रैली के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उत्तर 24 परगना जिले के टेंटुलिया में आयोजित रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने भाजपा की चुनावी रणनीति, एजेंसियों की निष्पक्षता और वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने जैसे मुद्दों पर गंभीर आरोप लगाए। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि भाजपा को असम में स्थानीय मतदाताओं पर भरोसा नहीं था, इसलिए उसने कथित तौर पर बाहरी लोगों को चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश से करीब 50,000 लोगों को ट्रेन के जरिए असम लाया गया, ताकि चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया जा सके। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

देश की एजेंसियां निष्पक्ष नहीं रहीं- ममता बनर्जी

ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की प्रमुख एजेंसियां अब निष्पक्ष नहीं रह गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा शासन के तहत संस्थागत स्वतंत्रता कमजोर हुई है और कई एजेंसियों को राजनीतिक प्रभाव में काम करने के लिए मजबूर किया गया है। अपने भाषण में उन्होंने तीखा बयान देते हुए कहा, “एक सांप पर तो भरोसा किया जा सकता है, लेकिन भाजपा पर कभी नहीं।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, क्योंकि यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप के रूप में देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए टीएमसी और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव और तेज होता दिखाई दे रहा है।

एसआईआर का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया

रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उनके अनुसार, इनमें से करीब 60 लाख हिंदू और 30 लाख मुस्लिम मतदाता शामिल हैं। हालांकि, इस आंकड़े पर भी चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने असम में हुए एनआरसी (National Register of Citizens) का भी उदाहरण दिया और कहा कि वहां 19 लाख लोगों के नाम सूची से बाहर किए गए थे, जिनमें 13 लाख हिंदू और 6 लाख मुस्लिम शामिल थे। उन्होंने इसे लेकर भी केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

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