KNEWS DESK: देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड को देखते हुए Reserve Bank of India (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। RBI ने डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित बनाने के लिए 5 नए सेफ्टी फीचर्स का प्रस्ताव दिया है। इनमें 10 हजार रुपये से ऊपर के UPI पेमेंट पर 1 घंटे का वेटिंग पीरियड और ‘किल स्विच’ जैसी सुविधा शामिल है। हालांकि, ये नियम अभी प्रस्तावित हैं और लागू नहीं हुए हैं।
क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक साल 2025 में देश में करीब 28 लाख डिजिटल फ्रॉड के मामले सामने आए। इन मामलों में आम लोगों के खातों से करीब 22,931 करोड़ रुपये की ठगी हुई। चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से 98% फ्रॉड 10 हजार रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन से जुड़े थे। यही वजह है कि RBI अब डिजिटल पेमेंट की स्पीड के साथ-साथ उसकी सुरक्षा पर भी फोकस कर रहा है।
क्या हैं RBI के 5 बड़े सेफ्टी प्लान?
1. किल स्विच फीचर
अगर किसी यूजर को धोखाधड़ी का शक होता है, तो वह एक क्लिक में अपने सभी डिजिटल पेमेंट मोड (UPI, नेट बैंकिंग, कार्ड) बंद कर सकता है। इससे फ्रॉड को तुरंत रोका जा सकेगा।
2. 10 हजार से ऊपर पेमेंट पर 1 घंटे की देरी
अब अगर आप 10,000 रुपये से ज्यादा का ट्रांजैक्शन करते हैं, तो पैसा तुरंत सामने वाले के पास नहीं जाएगा। वह 1 घंटे तक बैंक के पास ही रहेगा। इस दौरान अगर आपको गलती या फ्रॉड का शक हो, तो ट्रांजैक्शन कैंसिल किया जा सकता है।
3. सीनियर सिटिज़न के लिए ट्रस्टेड पर्सन सिस्टम
70 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए बड़े ट्रांजैक्शन पर एक ‘ट्रस्टेड पर्सन’ की मंजूरी जरूरी हो सकती है। इससे ठगी के मामलों में कमी आएगी।
4. म्यूल अकाउंट्स पर सख्ती
फर्जी खातों (म्यूल अकाउंट) पर लगाम लगाने के लिए RBI क्रेडिट लिमिट तय करने की योजना बना रहा है। तय सीमा से ज्यादा पैसा आने पर वह ‘शैडो बैलेंस’ में रखा जाएगा, जिसे तब तक नहीं निकाला जा सकेगा जब तक स्रोत साफ न हो।
5. मल्टी-लेयर ऑथेंटिकेशन
अब सिर्फ OTP से काम नहीं चलेगा। बड़े ट्रांजैक्शन के लिए बायोमेट्रिक, PIN या सिक्योरिटी टोकन जैसे अतिरिक्त सुरक्षा लेयर अनिवार्य किए जा सकते हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
RBI के इन प्रस्तावित नियमों से डिजिटल पेमेंट की स्पीड थोड़ी धीमी जरूर हो सकती है, लेकिन सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी। खासकर बड़े ट्रांजैक्शन में फ्रॉड का खतरा काफी कम होगा।
RBI ने इन नियमों पर 8 मई 2026 तक आम जनता से सुझाव मांगे हैं। इसके बाद फाइनल गाइडलाइंस जारी की जा सकती हैं।