कानपुरः फाइल दबाने और कोर्ट का नोटिस छिपाने पर केडीए के दो बाबू सस्पेंड, विभाग में मचा हड़कंप

डिजिटल डेस्क- कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर बड़ा एक्शन लिया गया है। जूही आवासीय योजना के एक प्लॉट से जुड़ी फाइल दबाने और हाईकोर्ट के नोटिस की जानकारी छिपाने के आरोप में दो बाबुओं को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है, खासकर तब जब इसी मामले में हाईकोर्ट ने केडीए उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल और सचिव अभय कुमार पांडेय के खिलाफ जमानती वारंट भी जारी किया है। मामला जूही योजना के एक प्लॉट के दाखिल-खारिज से जुड़ा है, जो लंबे समय से लंबित था। भूस्वामी ने करीब एक साल पहले इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। हैरानी की बात यह रही कि जब अदालत में सुनवाई शुरू हुई, तब केडीए की ओर से कोई प्रभावी पैरवी नहीं की गई। इससे नाराज होकर अदालत ने पांच दिन पहले उपाध्यक्ष और सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिए और उन्हें 11 मई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया।

ट्रांसफर हो जाने के बाद भी दबाए रखी फाइल

कोर्ट के आदेश के बाद ही केडीए के शीर्ष अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी हो सकी। इसके बाद उपाध्यक्ष मदन सिंह गर्ब्याल ने तुरंत संबंधित फाइल तलब की और जांच के निर्देश दिए। साथ ही विधि विभाग को हाईकोर्ट में प्राधिकरण का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद गंभीर हैं। पता चला कि जोन-3 में तैनात तत्कालीन बाबू राजेश कुमार ने इस फाइल को जानबूझकर दबाए रखा। वहीं, विधि विभाग में कार्यरत महिला बाबू रजनी तोमर ने हाईकोर्ट से आए समन और नोटिस की जानकारी उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंचाई। यही नहीं, चार महीने पहले दोनों का तबादला हो जाने के बाद भी उन्होंने इस संवेदनशील मामले को छिपाए रखा।

दोनों कर्मचारियों के विरूद्ध शुरू हुई विभागीय जांच

विधि विभाग के प्रभारी विशेष कार्याधिकारी सत शुक्ला ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे प्रकरण की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे। इस घटना ने केडीए की कार्यप्रणाली और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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