KNEWS DESK: देश में श्रमिकों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें समय-समय पर न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन करती रहती हैं। खासतौर पर असंगठित क्षेत्र के कामगारों को राहत देने के उद्देश्य से महंगाई भत्ते (DA) में बदलाव के साथ इन दरों को बढ़ाया जाता है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने भी मजदूरों के न्यूनतम वेतन में अहम बढ़ोतरी का फैसला किया है।

हरियाणा में बढ़ी मजदूरी
Haryana सरकार ने अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन में बड़ा इजाफा किया है। राज्य के श्रम मंत्री Anil Vij के अनुसार, पहले जहां अकुशल मजदूरों को 11,274.60 रुपये प्रति माह मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 15,220 रुपये कर दिया गया है। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया और 1 अप्रैल से लागू कर दिया गया है। इस बढ़ोतरी से निर्माण कार्य, सफाई, चौकीदारी, घरेलू काम, कृषि और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
देश में कैसे तय होती है न्यूनतम मजदूरी
भारत में न्यूनतम मजदूरी तय करने का काम केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर किया जाता है। मजदूरी दरों को कई आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है:
कौशल स्तर के आधार पर
अकुशल (Unskilled)
अर्ध-कुशल (Semi-skilled)
कुशल (Skilled)
अत्यधिक कुशल (Highly skilled)
भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर
ए (A) श्रेणी
बी (B) श्रेणी
सी (C) श्रेणी
इन वर्गों के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में मजदूरी दरें निर्धारित की जाती हैं, जिससे स्थानीय महंगाई और जीवन स्तर का संतुलन बना रहे।
किन क्षेत्रों के श्रमिकों पर होता है असर
न्यूनतम मजदूरी में बदलाव का प्रभाव कई क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों पर पड़ता है, जैसे:
- भवन निर्माण
- माल लोडिंग और अनलोडिंग
- चौकीदारी
- सफाई कार्य
- घरेलू कामकाज
- खनन
- कृषि क्षेत्र
कहां देखें पूरी लिस्ट
देशभर में लागू न्यूनतम मजदूरी दरों की पूरी जानकारी Ministry of Labour and Employment की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। वहां हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में अलग-अलग श्रेणियों की मजदूरी दरें देखी जा सकती हैं।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की वेबसाइट www.clc.gov.in पर ये दरें चेक की जा सकती हैं. आप इस लिंक पर जाकर अंग्रेजी व हिंदी में इन दरों को देख सकते हैं|
https://clc.gov.in/clc/sites/default/files/mygov_17751372721.pdf न्यूनतम मजदूरी में यह बढ़ोतरी श्रमिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। महंगाई के दौर में इस तरह के फैसले न सिर्फ उनकी आय बढ़ाते हैं, बल्कि आर्थिक स्थिरता भी प्रदान करते हैं।