डिजिटल डेस्क- मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष में जहां कई देश अमेरिका के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, वहीं फ्रांस ने स्पष्ट रूप से सैन्य सहयोग से दूरी बना ली है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कथित तौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से साफ कह दिया कि फ्रांस इस युद्ध में हिस्सा नहीं लेगा। अब इस फैसले का असर समुद्री व्यापार में भी देखने को मिल रहा है। ताजा घटनाक्रम में ईरान ने फ्रांस को बड़ी राहत देते हुए उसकी एक कंटेनर शिप को रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार होता है और जिसे ईरान ने हालिया तनाव के बीच सीमित कर दिया है।
CMA CGM क्रिबी होर्मुज को पार करने वाला पहला जहाज बना
जहाज ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, फ्रांसीसी शिपिंग कंपनी CMA CGM का कंटेनर जहाज ‘CMA CGM क्रिबी’ इस संघर्ष के बाद पश्चिमी यूरोप से जुड़ा पहला ऐसा जहाज बन गया है, जिसने इस मार्ग को सफलतापूर्वक पार किया। माल्टा के झंडे वाला यह जहाज दुबई के पास से पूर्व दिशा की ओर बढ़ा और ईरान के तटीय क्षेत्र के पास से तय स्वीकृत मार्ग से गुजरता हुआ आगे बढ़ गया। बताया जा रहा है कि यह जहाज फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र में फंसा हुआ था। दरअसल, ईरान ने जवाबी रणनीति के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा नियंत्रण कर दिया था, जिससे वैश्विक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस दौरान केवल उन देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही थी, जिन्हें ईरान अपना मित्र मानता है जैसे भारत, चीन और रूस।
फ्रांस की कंपनी ने ईरानी अधिकारियों से हासिल की थी विशेष अनुमति
फ्रांस की कंपनी ने कथित तौर पर ईरानी समुद्री अधिकारियों से संपर्क कर विशेष अनुमति हासिल की, जिसके बाद जहाज को सुरक्षित मार्ग दिया गया। माना जा रहा है कि यह जहाज अफ्रीका के कांगो गणराज्य के पोइंट-नोयर की ओर जा रहा है और यह रूट भारत, मध्य पूर्व और अफ्रीका को जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। इस घटनाक्रम के साथ ही ईरान ने एक और बड़ा संकेत दिया है। देश के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने घोषणा की है कि ईरान, ओमान के साथ मिलकर होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नया प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है। इसके तहत इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स कथित तौर पर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से प्रति बैरल एक डॉलर तक का टोल वसूलने की योजना बना रहा है।
जहाजों को पार कराने के लिए भुगतान पर किया जा रहा है विचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए अपनी पूरी जानकारी IRGC से जुड़े मध्यस्थों को देनी होगी। भुगतान के लिए चीनी युआन या डिजिटल स्टेबलकॉइन जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस को दी गई यह छूट केवल व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संदेश भी है। इससे यह साफ होता है कि ईरान वैश्विक मंच पर अपने हितों के अनुसार रणनीतिक साझेदारियों को प्राथमिकता दे रहा है।