मेरी शादी तय हो चुकी है अगर फेल हो गया तो बेइज्जती हो जाएगी…. यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन में देखने को मिल रही अजीबो-गरीब अपील

शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन इस समय युद्धस्तर पर चल रहा है। लेकिन इस बार परीक्षकों को सिर्फ सवालों के जवाब ही नहीं, बल्कि छात्रों की भावनात्मक कहानियां और अतरंगी अपीलें भी पढ़ने को मिल रही हैं, जिसने पूरे माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है। भौतिक विज्ञान जैसे कठिन विषय की कॉपियों में छात्रों ने ऐसे-ऐसे “फॉर्मूले” लिखे हैं, जो किताबों में नहीं, बल्कि सीधे दिल से निकले लगते हैं। एक इंटरमीडिएट छात्र ने अपनी कॉपी में लिखा, “सर, मेरी तैयारी अच्छी नहीं थी, लेकिन मेरी शादी तय हो चुकी है। अगर मैं फेल हो गया तो समाज में बेइज्जती होगी और तिलक भी कम चढ़ेगा… कृपया पास कर दीजिए।” यह पढ़कर परीक्षक भी हैरान रह गए कि फिजिक्स की कॉपी में अब ‘शादी का गणित’ भी शामिल हो गया है।

शादी बचाने की गुहार और मजबूरी की कहानी

एक छात्रा ने तो अपनी कॉपी में भावुक अपील करते हुए लिखा, “सर नमस्ते, मैं चार बहनों में तीसरे नंबर पर हूं और 13 मई को मेरी शादी है। घर में शादी की तैयारियों के कारण पढ़ाई नहीं कर पाई। अगर मैं फेल हुई तो मेरी शादी टूट जाएगी।”
उसने आगे यह भी जोड़ा कि परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि वह ‘दक्षिणा’ देने में भी असमर्थ है। इन अपीलों में कहीं परिवार की मजबूरी झलकती है, तो कहीं समाज का दबाव साफ दिखाई देता है।

CCTV ने ‘नोट संस्कृति’ पर लगाया ब्रेक

इस बार एक और दिलचस्प बदलाव देखने को मिला है कॉपियों में नोट मिलने के मामले लगभग न के बराबर हो गए हैं। लेकिन छात्रों ने इसकी वजह भी खुद ही बता दी। एक छात्र ने लिखा, “सर, मैं आपकी सेवा में 2000 रुपये रखना चाहता था, लेकिन क्लास में CCTV और सख्त टीचर की वजह से ऐसा नहीं कर सका… कृपया पास कर दीजिए।” यह लाइन पढ़कर परीक्षक भी मुस्कुरा उठे, लेकिन नियमों के आगे उनकी मजबूरी साफ है।

सख्ती का असर: नंबर सिर्फ उत्तर पर

बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के कड़े निर्देशों के बाद इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती दोनों बढ़ी हैं। साफ आदेश है कि अगर किसी कॉपी में पैसे मिलते हैं, तो छात्र के साथ-साथ संबंधित केंद्र के कक्ष निरीक्षक पर भी कार्रवाई होगी। इसी का असर है कि “नोट वाला खेल” इस बार लगभग खत्म हो गया है। हालांकि, भावनात्मक अपीलों की बाढ़ जरूर आ गई है। शिक्षकों का कहना है कि वे छात्रों की भावनाओं को समझते हैं, लेकिन अंक केवल सही उत्तर लिखने पर ही दिए जा रहे हैं।

आंकड़ों में मूल्यांकन की रफ्तार

बोर्ड के मुताबिक, इस साल कुल करीब 2.60 करोड़ कॉपियों का मूल्यांकन किया जाना है। 23 मार्च की शाम तक 32,53,505 कॉपियां जांची जा चुकी हैं। इनमें हाईस्कूल की 19,62,275 और इंटरमीडिएट की 12,91,248 कॉपियां शामिल हैं। प्रदेशभर के मूल्यांकन केंद्रों पर शिक्षक CCTV की निगरानी में लगातार कॉपियां जांच रहे हैं, ताकि समय पर परिणाम घोषित किए जा सकें।

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