KNEWS DESK – Supreme Court of India में पश्चिम बंगाल से जुड़े SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने कहा कि पश्चिम बंगाल को छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हुई है और वहां इस मुद्दे पर ज्यादा मुकदमेबाजी भी नहीं हुई।
बंगाल को लेकर कोर्ट की चिंता
सुनवाई के दौरान CJI ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया अभी भी अधूरी है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अन्य राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक दलों की सरकार होने के बावजूद यह प्रक्रिया बिना बड़े विवाद के पूरी कर ली गई।
राज्य की ओर से क्या दलील?
पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पेश वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि ‘तार्किक विसंगति’ सिर्फ बंगाल में देखने को मिल रही है और इसी वजह से यह मामला ज्यादा जटिल हो गया है। वहीं, वरिष्ठ वकील और TMC नेता मेनका गुरुस्वामी ने वोटर लिस्ट फ्रीज करने की तारीख बढ़ाने की मांग की, ताकि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने और दोबारा शामिल होने का मौका मिल सके।
कोर्ट ने इस मांग पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं दिया, लेकिन कहा कि जरूरत पड़ने पर इस पर विचार किया जाएगा। साथ ही, मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल तक के लिए टाल दी गई है।
चुनावी पृष्ठभूमि
पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में SIR प्रक्रिया को लेकर चल रही कानूनी बहस का सीधा असर चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
पहले जारी निर्देशों के मुताबिक, पोस्ट-SIR इलेक्टोरल रोल में करीब 60 लाख नाम ‘अंडर एडजुडिकेशन’ के रूप में चिह्नित किए गए थे। वहीं, Election Commission of India के अनुसार, सप्लीमेंट्री लिस्ट में करीब 29 लाख वोटर्स के नाम शामिल हैं, जिन पर न्यायिक अधिकारियों द्वारा निर्णय लिया जा चुका है।