डिजिटल डेस्क- कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को आतंकी फंडिंग और साजिश के मामले में दिल्ली की एक अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा जांच किए गए मामले में आया है, जिसमें अंद्राबी समेत तीन आरोपियों को दोषी पाया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंद्रजीत सिंह ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत यह सजा सुनाई। अदालत ने अंद्राबी पर कई लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
किन धाराओं में मिली सजा
अदालत ने अंद्राबी को यूएपीए की धारा 18 (आतंकी साजिश) के तहत उम्रकैद और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने की स्थिति में एक वर्ष की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। इसके अलावा आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और 121ए (राज्य के खिलाफ युद्ध की साजिश) के तहत भी उन्हें आजीवन कारावास दिया गया। यूएपीए की धारा 38 और 39 के तहत उन्हें 10-10 साल की सजा, जबकि आईपीसी की धारा 153ए और 505 के तहत पांच-पांच साल की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
सह-आरोपियों को भी कड़ी सजा
इस मामले में सह-आरोपी सोफी फेहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी कड़ी सजा दी गई है। दोनों को यूएपीए की धारा 18 और आईपीसी की धारा 120बी के तहत 30-30 साल के साधारण कारावास और 5 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। इसके अलावा अन्य धाराओं के तहत उन्हें 10-10 साल और 4-4 साल की अतिरिक्त सजाएं भी दी गई हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और हिरासत में बिताए गए समय को सजा में समायोजित किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला प्रतिबंधित संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत से जुड़ा है, जिसके सदस्य होने के आरोप में तीनों को दोषी ठहराया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये लोग सोशल मीडिया, भाषणों और सार्वजनिक सभाओं के जरिए भारत विरोधी और उग्रवादी विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। अदालत ने पाया कि संगठन जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग कर पाकिस्तान में मिलाने की वकालत कर रहा था। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को भड़काने और समाज में वैमनस्य फैलाने की कोशिश की जा रही थी। सजा पर सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत से कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी। एजेंसी ने तर्क दिया कि आरोपी भारत के खिलाफ गहरी साजिश का हिस्सा थे और उन्होंने युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का प्रयास किया। एनआईए ने यह भी दावा किया कि इस मामले के तार पाकिस्तान स्थित संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े हैं, जिससे यह एक सीमा पार की साजिश बन जाती है।