उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है. चुनाव भले ही अभी दूर हो, लेकिन सियासी दलों ने अभी से माहौल बनाना शुरू कर दिया है. उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों भाजपा के भीतर की खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है. बदरी-केदार मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अजेंद्र अजय के एक बयान ने न केवल पार्टी के अंदर हलचल मचा दी है, बल्कि विपक्ष को भी भाजपा पर हमला करने का मौका दे दिया है. स्थिति ऐसी बन गई है कि पार्टी नेतृत्व को भी सामने आकर नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की हिदायत देनी पड़ी है.वही आपको बता दे, की एक तरफ 2027 के चुनाव को लेकर राजनीतिक पार्टियों अपनी-अपनी जीत का दावा कर रही है.साथ ही बड़ी संख्या में अपने कुनबे को बढ़ाने का भी काम जोरो से पार्टी स्तर पर किया जा रहा है. कई विवादों में रहे पुराने नेताओं से भी पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलाकात कर इसे ऑल इज वेल की बात कर रहे हैं. तो कई कार्यकर्ताओं की भावनाएं भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बगावत के सुर प्रकट करती नजर आ रही है. ऐसे में तमाम राजनीतिक पार्टियों उन निगाहों को ताक रही है. जिससे आने वाले समय में उनकी पार्टी को बड़ा फायदा मिल सके, अंबुवन चुनाव से पहले दल बादल की राजनीति प्रदेश में सक्रिय हो जाती है. जिसके चलते तमाम पार्टियों ने बयान बाजी शुरू होने से पहले ही कड़ा संदेश पार्टी की ओर से देने का काम भी कर दिया है.ताकि चुनाव से पहले कोई बड़ा डैमेज ना हो जाए, अब देखना होगा आने वाले समय में किन भावनाओं को लेकर दल बदल होता है, या फिर नाराज रहे कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन मनाने में कामयाब होता है.
उत्तराखंड में भाजपा की राजनीतिक स्थिति लंबे समय से मजबूत मानी जाती रही है. लगातार चुनावी सफलता और संगठनात्मक मजबूती के कारण पार्टी सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर प्रभावशाली स्थिति में है. लेकिन समय-समय पर पार्टी के भीतर से उठने वाली नाराजगी की आवाजें नेतृत्व के लिए चुनौती बनती रही हैं. इसी कड़ी में अब अजेंद्र अजय का बयान चर्चा का विषय बन गया है, जो सबसे बड़ा विद्रोह माना जा रहा है.मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तुरंत हस्तक्षेप किया. उन्होंने अजेंद्र अजय से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश की और पार्टी नेताओं को सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर संयम बरतने की नसीहत दी. महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की असहमति या नाराजगी को सार्वजनिक करने के बजाय संगठन के मंचों पर उठाया जाना चाहिए.भाजपा के भीतर चल रही इस हलचल के बीच विपक्षी दल कांग्रेस भी सक्रिय हो गया है.हर कोई दल चाहता है. की चुनाव से पहले उसके हाथ भी कुछ लग सके, इस वजह से आरोप और प्रत्यारोप का माहौल बने का भी प्रयास चरम पर है.
चुनाव आने से पहले अब मुख्य विपक्षी दल भी सक्रिय हो गया है,विपक्ष का मानना है की भाजपा में इस समय जिस तरह की परिस्थिति बनी हुई है, उससे पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. भाजपा में विचारधारा से ज्यादा सत्ता की राजनीति हावी हो चुकी है, जिसके कारण कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है.अजेंद्र अजय का यह बयान सामने आते ही भाजपा के भीतर असहज स्थिति बन गई. क्योंकि मामला केवल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे प्रधानमंत्री के बयान से जोड़कर देखा जाने लगा. ऐसे में पार्टी के लिए इसे हल्के में लेना संभव नहीं था.इस वजह से भाजपा पार्टी दबे मुँह से सब सही है, की बात तो करती नजर आ रही है,लेकिन सब सही दिखाई नहीं दे रहा है.
उत्तराखंड में अगले साल 2027 के शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने है. चुनाव से पहले सभी राजनीति दलों ने अपनी कमर कस ली है. वहीं बीजेपी और कांग्रेस से चुनाव लड़ने का मन बना रहे नेताओं ने भी अपनी भागदौड़ शुरू कर दी है, फिलहाल भाजपा नेतृत्व इस पूरे मामले को संभालने की कोशिश में जुटा हुआ है,इससे पहले भी पार्टी से नाराज रहे विधायक अरविंद पांडेय और प्रणव सिंह चैम्पियन की हाल में हुई मुलाकात से व्यतीत हुआ है.लेकिन पार्टी ने इस मुलाकात को सामान्य मुलाकात बताया करा दिया है, इसी कड़ी में अब अजेंद्र अजय का बयान चर्चा का विषय बन गया है,लेकिन विपक्ष इसे पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के तौर पर पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस अंदरूनी असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या यह विवाद यहीं थमता है, या फिर आगे भी राजनीतिक बहस का विषय बना रहता है.