KNEWS DESK- हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। आज भक्त श्रद्धा और आस्था के साथ यह व्रत रख रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और भक्ति से भक्तों को विशेष फल प्राप्त होता है और भगवान की कृपा से जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
पूजा के समय कथा पढ़ना क्यों जरूरी माना जाता है
एकादशी व्रत में पूजा के साथ व्रत कथा का पाठ करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि बिना कथा सुने या पढ़े एकादशी का व्रत अधूरा माना जाता है।
पापमोचनी एकादशी के दिन कथा का पाठ करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन की परेशानियां दूर होने का आशीर्वाद भी मिलता है।
पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में चित्ररथ नाम का एक सुंदर वन था। इस वन में देवराज इंद्र गंधर्वों और अप्सराओं के साथ विहार किया करते थे। उसी वन में मेधावी नाम के एक ऋषि कठोर तपस्या में लीन थे।
एक दिन कामदेव ने ऋषि की तपस्या भंग करने के लिए मंजुघोषा नाम की अप्सरा को वहां भेजा। अप्सरा ने अपने नृत्य, गीत और आकर्षक हावभाव से ऋषि का मन मोह लिया। युवा मुनि उसके रूप और आकर्षण में ऐसे बंध गए कि तपस्या भूलकर उसके साथ समय बिताने लगे। कहा जाता है कि इस प्रकार आनंद में लीन रहते हुए 57 वर्ष बीत गए और ऋषि को समय का पता ही नहीं चला।
एक दिन मंजुघोषा ने ऋषि से देवलोक वापस जाने की अनुमति मांगी। तब ऋषि को आत्मज्ञान हुआ कि अप्सरा के मोह में पड़कर उन्होंने अपनी तपस्या नष्ट कर दी है।
इस बात से क्रोधित होकर उन्होंने मंजुघोषा को पिशाचनी बनने का श्राप दे दिया। श्राप सुनकर अप्सरा भयभीत हो गई और ऋषि से क्षमा मांगने लगी। तब मुनि ने उस पर दया करते हुए उसे पापमोचनी एकादशी का व्रत रखने की सलाह दी, जिससे वह श्राप से मुक्त हो सकती थी।
अप्सरा को उपाय बताकर ऋषि अपने पिता च्यवन ऋषि के आश्रम चले गए। जब उन्होंने अपने पुत्र से पूरी घटना सुनी तो श्राप देने के लिए उसकी निंदा की और उसे भी पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से मंजुघोषा के सारे पाप नष्ट हो गए और वह पिशाचनी रूप से मुक्त होकर फिर से देवलोक चली गई।
पापमोचनी एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत व्यक्ति को पापों से मुक्ति दिलाता है। इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और कथा पाठ करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।