Sanwaliya Seth Temple: सांवलिया सेठ मंदिर में टूटा दान का रिकॉर्ड, 46 करोड़ से ज्यादा दान, किलो के हिसाब से सोना-चांदी चढ़ा…जानें मंदिर की अद्भुत महिमा

KNEWS DESK- राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में एक बार फिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिली। मंदिर के मासिक भंडार की सातवें और अंतिम चरण की गणना पूरी होने के बाद करोड़ों रुपये की भेंट सामने आई है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार इस बार भंडार से 36 करोड़ 57 लाख 87 हजार 642 रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा भेंटकक्ष और ऑनलाइन दान के माध्यम से 10 करोड़ 45 हजार 282 रुपये भी मिले हैं। इस तरह कुल दान राशि 46 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है।

सोना-चांदी की भी भारी भेंट

नकद दान के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने बड़ी मात्रा में सोना और चांदी भी अर्पित की है। गणना के दौरान 2 किलो 967 ग्राम 480 मिलीग्राम सोना और 152 किलो 609 ग्राम चांदी प्राप्त हुई।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि हर महीने होने वाली भंडार गणना में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भेंट सामने आती है, जिससे मंदिर की लोकप्रियता और भक्तों की आस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है।

किस भगवान का मंदिर है सांवलिया सेठ

सांवलिया सेठ मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यहां स्थापित कृष्ण की प्रतिमा सांवले रंग की है, इसलिए भक्त उन्हें प्रेम से सांवलिया सेठ के नाम से पुकारते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर भगवान श्रीकृष्ण सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं और धन-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

कैसे हुई मंदिर की स्थापना

लोककथाओं के अनुसार वर्ष 1840 में भोलाराम गुर्जर नामक एक ग्वाले को सपने में भगवान कृष्ण के सांवलिया स्वरूप के दर्शन हुए। भगवान ने उन्हें बताया कि वे बागुंड गांव के एक स्थान पर जमीन के नीचे दबे हुए हैं।

भोलाराम ने यह बात गांव वालों को बताई। जब उस स्थान पर खुदाई की गई तो वहां से भगवान कृष्ण की तीन सुंदर मूर्तियां निकलीं। इनमें से एक मूर्ति मंडफिया गांव में स्थापित की गई। बाद में इसी स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जिसे आज सांवलिया सेठ मंदिर के नाम से जाना जाता है।

व्यापारी वर्ग में खास आस्था क्यों

राजस्थान के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में गिने जाने वाला सांवलिया सेठ मंदिर चित्तौड़गढ़-उदयपुर हाईवे पर मंडफिया गांव में स्थित है। यहां राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली और देश के कई अन्य हिस्सों से भक्त दर्शन करने आते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में स्थापित मूर्ति वही है जिसकी पूजा संत मीराबाई किया करती थीं। भक्तों का विश्वास है कि सांवलिया सेठ के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने पर व्यापार में वृद्धि, आर्थिक समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि खास तौर पर व्यापारी वर्ग में इस मंदिर के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्वास देखने को मिलता है।

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