K News desktop- मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब दवा उद्योग पर भी पड़ने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भारत में कई जरूरी दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसकी वजह दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत में तेज बढ़ोतरी बताई जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स और सॉल्वेंट्स की कीमतें पिछले दो हफ्तों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। युद्ध के कारण पैदा हुए शिपिंग संकट से चीन से आने वाले कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे भारतीय फार्मा कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया है।
दरअसल, दवाएं बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले एपीआई का बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है। कंटेनर जहाजों की कमी और वैश्विक शिपिंग बाधाओं के कारण इनकी सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ दवाओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
शिपिंग लागत में भी तेज उछाल देखा गया है। एक शिपमेंट की ढुलाई पर लगने वाला शुल्क दोगुना हो गया है और कंपनियों से 4,000 से 8,000 डॉलर तक अतिरिक्त सरचार्ज भी वसूला जा रहा है। इससे आयातकों के लिए लागत संभालना मुश्किल हो गया है।
फार्मा इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, एपीआई के साथ-साथ फार्मास्युटिकल सॉल्वेंट्स की कीमतें भी 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं। ऐसे में आयात करने वाली कंपनियां बढ़ी लागत का बोझ दवा कंपनियों पर डालने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात जल्दी नहीं सुधरे तो आने वाले समय में पैरासिटामोल समेत कई जरूरी दवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत के दवा बाजार पर भी पड़ने लगा है। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे आने वाले दिनों में कई जरूरी दवाएं महंगी हो सकती हैं।
इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक कई अहम कच्चे माल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। ग्लिसरीन की कीमत दिसंबर के मुकाबले करीब 64 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जबकि पैरासिटामोल की कीमत में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फार्मा इंडस्ट्री के भीतर से अब सरकार से दवाओं की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की अनुमति देने की मांग उठने लगी है