डिजिटल डेस्क- उदय भानु चिब को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। दिल्ली हाई कोर्ट ने पटियाला हाउस स्थित सेशंस कोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगाई गई थी। इस फैसले के बाद चिब के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि सेशंस कोर्ट ने आदेश पारित करते समय पर्याप्त विवेक का प्रयोग नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि जमानत पर रोक लगाने जैसा कदम केवल दुर्लभ और असाधारण परिस्थितियों में ही उठाया जाना चाहिए, लेकिन संबंधित आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह मामला उस श्रेणी में कैसे आता है।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा, “मुख्य सवाल यह है कि क्या आदेश पारित करते समय न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया गया था। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आदेश टिक नहीं सकता।” अदालत ने यह भी कहा कि सेशंस कोर्ट द्वारा मजिस्ट्रेट के जमानत आदेश पर रोक लगाने का निर्णय तर्कहीन प्रतीत होता है और इसमें हस्तक्षेप की आवश्यकता है। दरअसल, उदय भानु चिब को 28 फरवरी को दोपहर करीब 3:30 बजे मजिस्ट्रेट अदालत ने जमानत दे दी थी। हालांकि उसी शाम सेशंस कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर रोक लगा दी, जिससे उनकी रिहाई टल गई। इसके खिलाफ चिब ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 20 फरवरी को भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान यूथ कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने बिना शर्ट के विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया था। चिब की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सेशंस कोर्ट का आदेश बिना पर्याप्त कारण और ठोस आधार के पारित किया गया था। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस दलील को गंभीरता से लेते हुए सेशंस कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
6 मार्च को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में नोटिस जारी कर दिया है और कहा है कि विस्तृत सुनवाई के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। तब तक सेशंस कोर्ट का वह आदेश प्रभावी नहीं रहेगा, जिसके तहत जमानत पर रोक लगाई गई थी। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च को निर्धारित की गई है।