डिजिटल डेस्क- महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर पूरे देश ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके बलिदान दिवस पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले आजाद सदैव स्मरणीय रहेंगे। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका योगदान सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।”
27 फरवरी 1931: जब ‘आजाद’ ने चुनी आज़ादी
27 फरवरी 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों के साथ लंबी मुठभेड़ के बाद चंद्रशेखर आजाद ने अंतिम गोली स्वयं को मारकर वीरगति पाई। उन्होंने प्रण लिया था कि वे कभी अंग्रेजों के हाथ जीवित नहीं पकड़े जाएंगे और अपने इस संकल्प को उन्होंने आखिरी सांस तक निभाया। उनकी स्मृति में हर वर्ष 27 फरवरी को ‘बलिदान दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। आज जिस अल्फ्रेड पार्क को चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है, वह आज भी उनके साहस और अदम्य आत्मसम्मान की गवाही देता है।
योगी आदित्यनाथ का नमन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी महान क्रांतिकारी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा, “दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे। मातृभूमि की वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देने वाले चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।” सीएम योगी ने कहा कि उनका त्याग, तेजस्वी व्यक्तित्व और राष्ट्रभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।
शिवराज सिंह चौहान का संदेश
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी आजाद को नमन करते हुए लिखा, “मां भारती के अमर सपूत, महान क्रांतिकारी और वीर हुतात्मा चंद्रशेखर आजाद जी के बलिदान दिवस पर उनके चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।” उन्होंने कहा कि आजाद के ओजस्वी विचार और तेजस्वी जीवन जन-जन को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। मातृभूमि का कण-कण उनका ऋणी रहेगा। चंद्रशेखर आजाद केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की उस ज्वाला का प्रतीक थे, जिसने युवाओं के मन में आजादी की अलख जगाई। उनका साहस, आत्मबल और राष्ट्रप्रेम भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में अंकित है।