इजरायल की संसद नेसेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर कांग्रेस ने किया तीखा हमला

डिजिटल डेस्क- इजरायल की संसद नेसेट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन के बाद भारत की सियासत में तीखी बहस छिड़ गई है। कांग्रेस ने इस भाषण को लेकर प्रधानमंत्री पर जोरदार निशाना साधा है और आरोप लगाया है कि उनका वक्तव्य इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का ‘खुला बचाव’ था। पार्टी का कहना है कि इस संबोधन से भारत की नैतिक प्रतिष्ठा को आंच पहुंची है। कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला दिया। उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच इजरायल की स्थापना को लेकर हुए पत्राचार का उल्लेख किया। रमेश ने लिखा कि 13 जून 1947 को आइंस्टीन ने नेहरू को इजरायल की स्थापना के समर्थन में पत्र लिखा था, जिसका जवाब नेहरू ने लगभग एक महीने बाद दिया। इसके अलावा 5 नवंबर 1949 को प्रिंसटन में आइंस्टीन के घर पर दोनों की मुलाकात भी हुई थी।

जयराम रमेश ने इजरायल राष्ट्रपति के प्रस्ताव की दिलाई याद

जयराम रमेश ने यह भी याद दिलाया कि नवंबर 1952 में आइंस्टीन को इजरायल के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया गया था, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। कांग्रेस का तर्क है कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से संतुलित और सिद्धांत आधारित विदेश नीति अपनाई है, जिसमें नैतिक मूल्यों को प्रमुखता दी गई। ऐसे में नेसेट में प्रधानमंत्री का संबोधन उस परंपरा से अलग नजर आता है। कांग्रेस ने एक इजरायली मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील ईटे मैक के लेख का भी हवाला दिया, जिसमें पीएम मोदी के भाषण की आलोचना की गई थी। जयराम रमेश ने उस लेख को साझा करते हुए कहा कि ‘गोदी मीडिया’ में भले ही भाषण की सराहना की गई हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी आलोचना भी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषण भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकता है।

भारत-इजरायल संबंधों को मिलेगी मजबूती- भाजपा

वहीं, भाजपा और सरकार समर्थकों का कहना है कि प्रधानमंत्री का संबोधन भारत-इजरायल संबंधों की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और इजरायल आज मजबूत रणनीतिक साझेदार हैं और रक्षा, कृषि, तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। इतिहास पर नजर डालें तो भारत ने 17 सितंबर 1950 को इजरायल को आधिकारिक मान्यता दी थी। हालांकि, दोनों देशों के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध 1992 में स्थापित हुए, जब नियमित दूतावास खोले गए और संबंधों को नई दिशा मिली। तब से दोनों देशों के रिश्ते लगातार प्रगाढ़ होते गए हैं।

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