KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में अभी करीब एक साल का समय बाकी है, लेकिन सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। लंबे समय से सत्ता से बाहर चल रहीं मायावती इस बार शुरुआती दौर से ही सक्रिय नजर आ रही हैं। उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि बीएसपी आगामी चुनाव अकेले लड़ेगी। अब पार्टी ने प्रत्याशियों की घोषणा की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
बीएसपी ने अपना पहला टिकट आशीष पांडेय को दिया है, जिन्हें जालौन जिले की माधौगढ़ विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। उन्हें इस सीट का प्रभारी भी नियुक्त किया गया है। माधौगढ़ को बीएसपी का मजबूत गढ़ माना जाता है और 2017 के चुनाव में पार्टी यहां दूसरे स्थान पर रही थी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहला टिकट ब्राह्मण बिरादरी को देकर मायावती ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। बीते कुछ समय से वह सार्वजनिक मंचों से ब्राह्मण समाज की उपेक्षा और असंतोष का मुद्दा उठाती रही हैं।
हाल ही में हुई पार्टी बैठकों में मायावती ने कहा था कि मौजूदा सरकार में कई वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जिनमें ब्राह्मण समाज की नाराजगी अधिक मुखर है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जितना सम्मान और प्रतिनिधित्व बीएसपी सरकार के दौरान ब्राह्मणों को मिला, क्या उतना अन्य दल दे पाए हैं?
अपने 70वें जन्मदिन (15 जनवरी) के मौके पर भी उन्होंने ब्राह्मण समाज को विशेष रूप से संबोधित किया और दावा किया कि बीएसपी शासनकाल में सभी वर्गों को संतुलित प्रतिनिधित्व दिया गया था।
हाल में ‘घूसखोर पंडत’ नामक फिल्म को लेकर भी मायावती ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया और केंद्र सरकार से ऐसे कंटेंट पर रोक लगाने की मांग की थी। इस बयान के जरिए भी उन्होंने ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश की।
मायावती का ब्राह्मण कार्ड नया नहीं है। 2007 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दलित-ब्राह्मण सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पूर्ण बहुमत हासिल किया था। “हाथी नहीं गणेश है…” जैसे नारों के साथ बीएसपी ने व्यापक सामाजिक समीकरण बनाया और सत्ता पर काबिज हुई।
अब 2027 के चुनाव से पहले मायावती उसी फॉर्मूले को नए सिरे से लागू करने की रणनीति पर काम करती दिख रही हैं। पहला टिकट ब्राह्मण प्रत्याशी को देकर उन्होंने संकेत दे दिया है कि आने वाले दिनों में पार्टी की राजनीति सामाजिक संतुलन और नए समीकरणों पर केंद्रित रहेगी।
आने वाले महीनों में बीएसपी अन्य सीटों पर भी प्रभारियों और संभावित प्रत्याशियों की घोषणा करेगी। साफ है कि उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है।