Knews Desk: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। नदी के तेज बहाव में सड़कें, पुल, बाजार और कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। तिमुरे से स्याफ्रुबेशी तक बड़े इलाके में बाढ़ का पानी फैल गया। 1000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर है, जिनमें 100 से अधिक भारतीय और करीब 300 विदेशी पर्यटक शामिल बताए जा रहे हैं।
नेपाल सरकार के मुताबिक, सुबह करीब 8:37 बजे इलाके में भूकंप के झटके भी महसूस किए गए थे। शुरुआती जानकारी में हिमस्खलन को बाढ़ की संभावित वजह बताया गया है, हालांकि इसकी अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में पानी अचानक कहां से आया?
हिमनदी झील टूटने का शक
त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर रंजन कुमार दहल के मुताबिक, सामने आए वीडियो में बाढ़ का पानी सामान्य बाढ़ की तुलना में काफी ज्यादा और बेहद तेज दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, इतनी बड़ी बाढ़ केवल नदी के रास्ते में किसी रुकावट के कारण नहीं आ सकती। इसके पीछे बड़ी मात्रा में पानी का कहीं जमा होना और फिर अचानक नीचे की ओर बहना संभव है।
विशेषज्ञों को आशंका है कि लेंडे नदी के ऊपरी हिस्से में मौजूद तीन हिमनदी झीलों में से कोई एक टूट सकती है। संभावित रूप से भूस्खलन या हिमस्खलन के कारण झील पर दबाव बढ़ा होगा और पानी अचानक बाहर निकल गया होगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-सी झील टूटी और घटना वास्तव में कैसे हुई।
चीन से मिलने वाले डेटा पर निर्भरता
इस आपदा के बीच समय पर चेतावनी मिलने का सवाल भी उठ रहा है। नेपाली विशेषज्ञों के पास प्रभावित क्षेत्र की ताजा सैटेलाइट तस्वीरें और पर्याप्त रियल टाइम डेटा उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। विशेषज्ञों ने चीनी टीमों के साथ ऑनलाइन बैठकें की हैं और संभावित स्थानों की जानकारी साझा की है।
अनुमान है कि संभावित घटना स्थल नेपाल-चीन सीमा से करीब 30 से 40 किलोमीटर ऊपर हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर झील टूटने या हिमस्खलन की जानकारी समय रहते मिल जाती, तो नीचे के इलाकों में रहने वाले लोगों को करीब 30 से 45 मिनट पहले चेतावनी दी जा सकती थी। इससे जान-माल का नुकसान कम करने में मदद मिल सकती थी।
पिछले साल भी आई थी ऐसी बाढ़
भोटेकोशी क्षेत्र में पिछले साल भी इसी तरह की बाढ़ आई थी। उस घटना में 9 लोगों की मौत हुई थी और 18 लोग लापता हुए थे। बाद में इसके पीछे तिब्बत में एक सुप्राग्लेशियल झील से अचानक पानी निकलने की बात सामने आई थी।
विशेषज्ञ इस बार की घटना को उससे भी ज्यादा गंभीर मान रहे हैं। साथ ही हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन को भी ऐसे खतरों से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने, हिमस्खलन और भूस्खलन की बढ़ती घटनाओं से हिमनदी झीलों के अचानक टूटने का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है और इस आपदा की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं।