भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की पृष्ठभूमि में विदेशी नेताओं का स्वागत किया. इस दौरान भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली.
Knews Desk- नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन में शामिल होने पहुंचे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया. इस मौके पर तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित प्रसिद्ध रामनाथस्वामी मंदिर की पृष्ठभूमि ने सभी का ध्यान आकर्षित किया.
रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू तीर्थस्थल है. इसे भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों और चार धामों में शामिल किया जाता है. मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व देश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है.
रामेश्वरम स्थित रामनाथस्वामी मंदिर का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां भगवान शिव की पूजा की थी. मंदिर अपने विशाल गलियारों के लिए भी प्रसिद्ध है, जिन्हें भारत के सबसे लंबे मंदिर गलियारों में गिना जाता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ समय पहले रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुंचे थे. उनकी उस यात्रा के दौरान मंदिर के पुजारी ने उन्हें माला पहनाकर स्वागत किया था.
पुतिन और पेजेशकियन से हुई पीएम मोदी की मुलाकात
ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की और ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित किया.
भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है. ऐसे में सम्मेलन के दौरान वैश्विक मुद्दों, आर्थिक सहयोग और सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हो रही है.
भारत-रूस संबंधों पर हुई चर्चा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने अगस्त में बिश्केक में आयोजित 26वें SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद एक बार फिर बातचीत की. दोनों नेताओं ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कौशल विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की.
बैठक में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, बहुपक्षीय सहयोग और पश्चिम एशिया तथा काला सागर क्षेत्र के संघर्षों जैसे प्रमुख क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ.
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शनिवार को सदस्य देशों की ओर से संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा. रिपोर्ट के अनुसार, इस पर सहमति बनाने के लिए कई दौर की बातचीत हुई. चर्चा में कुछ मुद्दों पर मतभेद सामने आए, लेकिन भारत ने सदस्य देशों के बीच सहमति कायम करने के लिए लगातार प्रयास किए.
विकास और नवाचार पर भारत का जोर
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है. इस वर्ष भारत की अध्यक्षता का विषय “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” रखा गया है.
सम्मेलन में विकास, स्थिरता, नवाचार और सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. रामनाथस्वामी मंदिर की पृष्ठभूमि में विदेशी नेताओं का स्वागत भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर बना.