Knews Desk– भारत के चंद्र मिशन चंद्रयान-2 ने चांद को लेकर एक और बड़ी और अहम खोज की है। वैज्ञानिकों को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव यानी साउथ पोल के पास स्थित गहरे क्रेटर्स की सतह के नीचे भारी मात्रा में ‘वॉटर-आइस’ यानी पानी की बर्फ के मजबूत संकेत मिले हैं। इस खोज ने भविष्य में चांद पर इंसानी मिशनों और स्थायी बेस बनाने की संभावनाओं को और मजबूत कर दिया है।
यह महत्वपूर्ण खोज चंद्रयान-2 ऑर्बिटर में लगे डुअल फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार (DFSAR) की मदद से की गई है। यह अत्याधुनिक रडार माइक्रोवेव इमेजिंग तकनीक का उपयोग करके चंद्रमा की सतह और उसके नीचे मौजूद संरचनाओं का अध्ययन करता है। खास बात यह है कि यह चंद्रमा पर भेजा गया दुनिया का पहला पूरी तरह पोलारिमेट्रिक सिंथेटिक अपर्चर रडार है, जो एल-बैंड और एस-बैंड फ्रीक्वेंसी पर काम करता है।
वैज्ञानिकों ने रडार पोलारिमेट्रिक विश्लेषण के जरिए दक्षिणी ध्रुव के चार डबल-शैडोड क्रेटर्स में बर्फ के संभावित संकेतों की पहचान की। बर्फ और चट्टानों में अंतर समझने के लिए शोधकर्ताओं ने नई रडार तकनीक विकसित की। इसके तहत सर्कुलर पोलराइजेशन रेशियो (CPR) और डिग्री ऑफ पोलराइजेशन (DOP) जैसे पैरामीटर्स का इस्तेमाल किया गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार जिन इलाकों में CPR की वैल्यू 1 से ज्यादा और DOP की वैल्यू 0.13 से कम पाई गई, वहां सतह के नीचे दबे बर्फ के भंडार होने की संभावना मजबूत मानी गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। इससे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी, ऑक्सीजन और ईंधन तैयार करने में मदद मिल सकती है।