गर्मी बढ़ी तो बढ़ा जल संकट, सिंधु जल को लेकर पाकिस्तान की UNSC में गुहार

Knews Desk- जैसे-जैसे गर्मी का मौसम तेज हो रहा है, वैसे-वैसे पाकिस्तान में पानी की चिंता भी बढ़ती नजर आ रही है। इसी बीच सिंधु जल संधि को लेकर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण स्थिति सामने आ गई है। हाल ही में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से अपील की है कि वह भारत पर दबाव बनाए ताकि सिंधु जल संधि को पूरी तरह बहाल किया जा सके। पाकिस्तान का कहना है कि भारत द्वारा इस संधि को ‘स्थगित’ करना न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है, बल्कि इससे वहां की मानवीय स्थिति भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है। पाकिस्तान के मुताबिक, सिंधु नदी प्रणाली उसके लिए जीवनरेखा की तरह है, और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा उसके कृषि और जल आपूर्ति तंत्र पर सीधा असर डालती है।

आसिम इफ्तिखार अहमद ने औपचारिक रूप से उठाये मुद्दे

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने इस मुद्दे को औपचारिक रूप से उठाते हुए UNSC अध्यक्ष जमाल फारेस अलरोवाई को एक पत्र सौंपा। इस पत्र में पाकिस्तान ने मांग की है कि परिषद भारत से बातचीत कराए और सिंधु जल संधि के तहत सभी प्रावधानों को दोबारा लागू करवाए। इनमें जल प्रवाह का डेटा साझा करना और तकनीकी सहयोग शामिल है। पाकिस्तान की ओर से यह भी कहा गया है कि जल विवाद को नजरअंदाज करना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। देश का दावा है कि अगर समय रहते समाधान नहीं निकला, तो आने वाले समय में जल संकट और गंभीर हो सकता है।

भारत ने पाकिस्तान को दिया था सख्त संदेश

भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इस संधि को ‘स्थगित’ करने का निर्णय लिया था। उस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। भारत ने इस फैसले के जरिए सख्त संदेश दिया था कि आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय समझौते एक साथ नहीं चल सकते। भारत का रुख रहा है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद को समर्थन मिलता रहेगा, तब तक सहयोगात्मक समझौतों की समीक्षा जरूरी है। सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई एक ऐतिहासिक समझौता थी, जिसे लंबे समय तक दोनों देशों के बीच सबसे स्थिर जल समझौतों में गिना जाता रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ते राजनीतिक तनाव और सुरक्षा मुद्दों ने इस समझौते पर भी असर डाला है।

पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव

गर्मी के मौसम में पाकिस्तान में पानी की मांग बढ़ जाती है, खासकर कृषि क्षेत्रों में। ऐसे में सिंधु जल प्रणाली का महत्व और भी बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल वितरण में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर किसी तरह की सीधी बातचीत या नया समझौता नहीं हो पाया है। एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सिंधु जल विवाद एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां एक ओर पाकिस्तान राहत की मांग कर रहा है, वहीं भारत अपने सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टिकोण पर कायम है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस मुद्दे पर कोई कूटनीतिक समाधान निकल पाता है या तनाव और बढ़ता है।

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