Knews Desk– NEET परीक्षा को लेकर उठे विवाद और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। शुरुआत में यह आंदोलन मुख्य रूप से छात्रों और CJP के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा था, लेकिन जैसे-जैसे प्रदर्शन तेज हुआ, विपक्षी दलों ने भी इसे प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के धरने और विपक्षी नेताओं की सक्रियता के बाद यह मामला केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया।
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्रों, अभिभावकों और युवाओं के जुटने के बाद आंदोलन ने नया मोड़ लिया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए छात्रों के समर्थन में खुलकर आवाज उठाई। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर सवाल उठाए और सरकार से जवाब मांगा।इसके अगले ही दिन राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के निकट धरना दिया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी और कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले सहित इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने भी इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। इससे यह संदेश गया कि विपक्ष NEET विवाद के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस ने सरकार से संसद में NEET मामले पर विस्तृत चर्चा कराने और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने संकेत दिए कि वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, हालांकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर सरकार ने कोई सहमति नहीं जताई।इस घटनाक्रम के बीच दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई। CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए कई इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गईं। प्रशासन ने लोगों से ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करने और यात्रा से पहले अपडेट देखने की अपील की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि NEET विवाद विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक बड़ा अवसर बनकर सामने आया है। हालांकि, इंडिया ब्लॉक के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राय भी देखने को मिली। संसद में चर्चा के तरीके और विपक्ष की साझा रणनीति को लेकर कुछ दलों के बीच मतभेद भी सामने आए, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगने के पक्ष में दिखाई दिए।फिलहाल NEET विवाद केवल परीक्षा प्रणाली का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर होने वाली चर्चा, सरकार की आगे की रणनीति और विपक्ष की एकजुटता इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेगी। वहीं, लाखों छात्रों और अभिभावकों की नजर इस बात पर टिकी है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।