Knews Desk – भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को लेकर आने वाले दिनों में अहम developments देखने को मिल सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की नई दिल्ली में होने वाली मुलाकात पर सबकी नजरें टिकी हैं। इस बैठक के दौरान BrahMos सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को अपग्रेड करने, नई रक्षा तकनीक पर सहयोग बढ़ाने और संयुक्त उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने संकेत दिए हैं कि भारत और रूस BrahMos मिसाइल में नई क्षमताएं और अतिरिक्त फीचर्स जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। दोनों देश पहले से ही इस मिसाइल का संयुक्त रूप से उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे में अब इसे बदलती सुरक्षा जरूरतों के मुताबिक और सक्षम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, मिसाइल में किए जाने वाले संभावित बदलावों की विस्तृत तकनीकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।BrahMos भारत और रूस की साझेदारी से विकसित की गई सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। इसे जमीन, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जाने वाले अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया गया है। इसकी तेज गति, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और विभिन्न प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किए जाने की क्षमता इसे भारतीय रक्षा व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हथियार बनाती है। संभावित अपग्रेड के जरिए इसकी क्षमताओं को और बेहतर बनाने की कोशिश की जा सकती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की मुलाकात नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस बैठक में रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ नई तकनीक, संयुक्त उत्पादन और भविष्य के रणनीतिक सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है। रूस की ओर से नई पीढ़ी के जेट इंजन से जुड़े प्रस्ताव की भी चर्चा है, जिससे भारत-रूस के रक्षा संबंधों में नए सहयोग के रास्ते खुल सकते हैं।भारत के लिए BrahMos सिर्फ एक महत्वपूर्ण मिसाइल परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे तकनीकी और रणनीतिक सहयोग का प्रमुख उदाहरण भी है। भारतीय सशस्त्र बलों में इसके अलग-अलग वेरिएंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में इसकी नई क्षमताओं पर काम करना भारत की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, भारत ने पिछले कुछ वर्षों में हथियारों के आयात के मामले में रूस पर अपनी निर्भरता कम की है। SIPRI के आंकड़ों के मुताबिक, 2021-25 के दौरान भारत के बड़े हथियारों के आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत रही, जबकि इससे पहले के पांच वर्षों में यह आंकड़ा करीब 51 प्रतिशत था। इसके बावजूद BrahMos जैसे संयुक्त रक्षा प्रोजेक्ट दोनों देशों के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को दर्शाते हैं।अब सभी की नजरें मोदी-पुतिन की आगामी मुलाकात पर हैं। अगर BrahMos के अपग्रेड को लेकर कोई महत्वपूर्ण निर्णय होता है, तो इससे न केवल भारतीय रक्षा क्षमता को मजबूती मिल सकती है, बल्कि भारत-रूस के संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग को भी नई दिशा मिल सकती है।