अब ड्रोन और हेलिकॉप्टर से नहीं बच पाएगा दुश्मन, V-SHORADS बनेगा भारत की नई सुरक्षा ढाल

रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने DRDO के स्वदेशी V-SHORADS सिस्टम को मंजूरी दे दी है। यह मैन-पोर्टेबल मिसाइल सिस्टम 6 किलोमीटर तक ड्रोन, हेलिकॉप्टर और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों को मार गिराने में सक्षम है। इसकी मल्टी-स्पेक्ट्रल सीकर तकनीक इलेक्ट्रॉनिक जामिंग और फ्लेयर को भी मात दे सकती है। फिलहाल इसका ट्राइपॉड वर्जन तैयार है, जबकि जल्द ही कंधे से दागा जाने वाला हल्का वर्जन भी आएगा।

Knews Desk- भारतीय सेना की एयर डिफेंस ताकत को नई ऊंचाई मिलने वाली है. दरअसल राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने करीब 52 हजार करोड़ रुपये के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इन प्रस्तावों में सबसे ज्यादा चर्चा जिस हथियार की हो रही है, वह है स्वदेशी V-SHORADS यानी वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम. आकार में छोटा लेकिन मारक क्षमता में बेहद घातक यह सिस्टम दुश्मन के ड्रोन, हेलिकॉप्टर, फाइटर जेट और कम ऊंचाई पर आने वाले किसी भी हवाई खतरे को कुछ ही सेकंड में खत्म करने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि इसे भारतीय सेना की नई ‘छुटकू S-400’ ढाल माना जा रहा है.

क्या है V-SHORADS?

V-SHORADS एक मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (MANPADS) है, जिसे DRDO ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है. इसे भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

इसकी सबसे बड़ी ताकत है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों को बेहद तेजी और सटीकता से निशाना बनाता है. आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरे हैं, वहां यह सिस्टम सैनिकों के लिए एक मोबाइल एयर डिफेंस कवच साबित होगा.

6 किलोमीटर दूर से करेगा हमला

डीआरडीओ के परीक्षणों के मुताबिक, यह मिसाइल लगभग 6 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद हवाई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है. फरवरी में ओडिशा के चांदीपुर टेस्ट रेंज में हुए लगातार तीन सफल परीक्षणों में इसने अलग-अलग ऊंचाई, गति और दूरी पर उड़ रहे हाई-स्पीड लक्ष्यों को सफलतापूर्वक नष्ट किया था.

पहाड़ों में भी दुश्मन नहीं बचेगा

फिलहाल V-SHORADS का ट्राइपॉड आधारित संस्करण तैयार है, जिसका कुल वजन करीब 40 किलोग्राम है. यह संवेदनशील सीमाओं, ऊंची पहाड़ियों और स्थिर रक्षा चौकियों पर तैनाती के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है. लेकिन असली गेमचेंजर इसका अगला संस्करण होगा.

अब आएगा कंधे से दागने वाला वर्जन

DRDO अब V-SHORADS का शोल्डर फायर्ड यानी कंधे से दागा जाने वाला हल्का वर्जन विकसित कर रहा है. इसका वजन 15-18 किलोग्राम के बीच रखने का लक्ष्य है, जिससे यह अमेरिकी स्ट्रिंगर और रूसी वरबा जैसी श्रेणी में शामिल हो जाएगा. इसका मतलब यह होगा कि भारतीय सैनिक चलते-फिरते ऑपरेशन के दौरान भी कुछ सेकंड में मिसाइल दाग सकेंगे.

कितना घातक होगा यह ‘छुटकू S-400’?

रूस का S-400 ट्रायंफ लंबी दूरी पर दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने के लिए जाना जाता है. वहीं V-SHORADS कम दूरी पर आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ काम करेगा. यानी जहां S-400 दूर से हमला रोकेगा, वहीं V-SHORADS सेना की अग्रिम चौकियों और सैनिकों के सिर के ऊपर मंडराने वाले ड्रोन और हेलिकॉप्टरों को खत्म करेगा. दोनों मिलकर भारत की बहुस्तरीय एयर डिफेंस ढाल को मजबूत बनाएंगे.

चीन-पाकिस्तान की बढ़ेगी चिंता

सीमा पर ड्रोन घुसपैठ और कम ऊंचाई वाले हवाई हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में V-SHORADS भारतीय सेना को त्वरित प्रतिक्रिया देने की क्षमता देगा. खासकर चीन और पाकिस्तान सीमा पर तैनात जवानों के लिए यह एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो सकता है.

डीएसी की मंजूरी के बाद V-SHORADS के सेना में शामिल होने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है. आकार में छोटा होने के बावजूद इसकी मारक क्षमता बेहद घातक है. यही वजह है कि इसे भारतीय सेना की नई ‘छुटकू एस-400’ ढाल बताया जा रहा है. एक ऐसा हथियार जो ड्रोन से लेकर हेलिकॉप्टर तक हर खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है.

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