चुनावी राजनीति से सिद्धारमैया का संन्यास, 2028 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान

Knews Desk– कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि वह 2028 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह घोषणा उन्होंने मांड्या जिले के केआरपेटे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान की। सिद्धारमैया ने अपने फैसले के पीछे बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया। हालांकि उनके समर्थकों ने उनसे राजनीति में सक्रिय बने रहने की अपील की, लेकिन उन्होंने अपने फैसले को दोहराते हुए कहा कि अब नई पीढ़ी को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए।

सिद्धारमैया का यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ ही समय पहले उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने डीके शिवकुमार को राज्य का नया मुख्यमंत्री बनाया। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब उन्होंने साफ कर दिया है कि वह अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

कार्यक्रम के दौरान जब सिद्धारमैया ने अपने फैसले की घोषणा की, तो वहां मौजूद समर्थकों ने इसका विरोध करते हुए उनसे राजनीति में बने रहने की अपील की। कई समर्थकों ने कहा कि उन्हें कम से कम अगले 10 वर्षों तक सक्रिय राजनीति में रहना चाहिए, लेकिन सिद्धारमैया ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्होंने अपना निर्णय सोच-समझकर लिया है और अब उसे बदलने का सवाल नहीं उठता।सिद्धारमैया कर्नाटक की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए और कुल मिलाकर आठ वर्षों से अधिक समय तक इस पद पर रहे। इसी वजह से वह कर्नाटक के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। उनका पहला कार्यकाल 13 मई 2013 से 15 मई 2018 तक चला, जिसमें उन्होंने अपना कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा किया। इसके बाद कांग्रेस की वापसी के साथ उन्होंने 20 मई 2023 से 3 जून 2026 तक दूसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला।

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, सिद्धारमैया का राजनीतिक सफर भी काफी लंबा और सफल रहा है। वह नौ बार विधायक चुने जा चुके हैं और पिछले कई दशकों से कर्नाटक की राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं। अपनी सादगी, प्रशासनिक अनुभव और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण उन्होंने राज्य की राजनीति में अलग पहचान बनाई। कांग्रेस के भीतर भी उन्हें एक मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में देखा जाता है।दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब सिद्धारमैया ने चुनावी राजनीति से संन्यास लेने की बात कही हो। वर्ष 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने मीडिया से कहा था कि वह अपना आखिरी चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बाद 2018 विधानसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने दोहराया था कि यह उनका अंतिम चुनाव होगा। हालांकि परिस्थितियों के चलते उन्होंने राजनीति जारी रखी और बाद में एक बार फिर मुख्यमंत्री बने।

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