Packaged Food Warning Label: पैकेज्ड फूड को लेकर भारत में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है. FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट के सामने फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत ज्यादा चीनी, नमक या फैट वाले प्रोडक्ट पर सामने लाल रंग का चेतावनी निशान लगाया जा सकता है.
Knews Desk- चिप्स, बिस्किट, इंस्टेंट नूडल्स, सॉफ्ट ड्रिंक और दूसरे पैकेज्ड फूड खरीदते समय अब आपको पैकेट के पीछे लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ने की जरूरत कम पड़ सकती है. भारत में ऐसे खाद्य उत्पादों के पैकेट के सामने ही लाल रंग का चेतावनी निशान लगाने का प्रस्ताव सामने आया है, जिससे ग्राहक को तुरंत पता चल सके कि
किसी प्रोडक्ट में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है.
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सुप्रीम कोर्ट में फ्रंट-ऑफ-पैक वार्निंग लेबल को लेकर प्रस्ताव पेश किया है. इसका उद्देश्य ग्राहकों को खरीदारी के समय ही खाद्य उत्पाद की पोषण संबंधी स्थिति की आसान जानकारी देना है.
प्रस्ताव के तहत पैकेज्ड फूड के सामने लाल रंग का हेक्सागोन यानी छह कोनों वाला चेतावनी निशान लगाया जा सकता है. इसमें प्रोडक्ट के हिसाब से ‘ज्यादा चीनी’, ‘ज्यादा नमक’, ‘ज्यादा फैट’ या अन्य चेतावनी दी जा सकती है.
इसका मकसद यह है कि ग्राहक को पैकेट पलटकर छोटे अक्षरों में लिखी पोषण संबंधी जानकारी तलाशने की जरूरत न पड़े. लाल निशान देखकर वह आसानी से समझ सके कि संबंधित प्रोडक्ट में किसी पोषक तत्व की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक है.
किन वजहों से लाया जा रहा है यह प्रस्ताव?
पैकेज्ड और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते इस्तेमाल के बीच स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है. ICMR-NIN की 2024 की डाइटरी गाइडलाइंस में भी ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करने की सलाह दी गई है.
गाइडलाइन में संतुलित और विविध आहार लेने के साथ-साथ बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से सावधान रहने पर जोर दिया गया है.
कई पैकेज्ड फूड और पेय पदार्थों में जोड़ी गई चीनी की मात्रा काफी ज्यादा हो सकती है. ऐसे उत्पादों का लगातार अधिक सेवन डाइट में अतिरिक्त कैलोरी बढ़ा सकता है. फ्रंट पैकेज चेतावनी का उद्देश्य ग्राहक को इसी बारे में खरीदारी के वक्त सचेत करना है.
नमक की मात्रा पर भी नजर
पैकेज्ड स्नैक्स और कई इंस्टेंट फूड में नमक की मात्रा अधिक हो सकती है. जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना जाता है. इसलिए प्रस्तावित लेबल में ज्यादा नमक वाले उत्पादों की पहचान आसान बनाने की बात कही गई है.
फैट और कैलोरी भी अहम
कुछ पैकेज्ड खाद्य पदार्थों में फैट और कैलोरी की मात्रा काफी अधिक होती है. प्रस्तावित चेतावनी लेबल के जरिए ग्राहक को ऐसे उत्पादों के बारे में भी खरीदारी से पहले जानकारी मिल सकेगी.
कितनी मात्रा होने पर लगेगा लाल निशान?
यही इस प्रस्ताव का सबसे अहम सवाल है. ICMR-NIN की 2024 की गाइडलाइन में खाद्य पदार्थों को उनके पोषक तत्वों और ऊर्जा की मात्रा के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है.
ठोस या पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के लिए संबंधित श्रेणी में 100 ग्राम पर कुछ सीमाएं निर्धारित की गई हैं. इनमें:
- जोड़ी गई फैट: 100 ग्राम में 4.2 ग्राम से ज्यादा
- जोड़ी गई चीनी: 100 ग्राम में 3 ग्राम से ज्यादा
- नमक: 100 ग्राम में 0.625 ग्राम से ज्यादा
- ऊर्जा: 100 ग्राम में 250 किलो कैलोरी तक की एक श्रेणी तय की गई है
इन सीमाओं से ऊपर जाने पर संबंधित पोषक तत्व के आधार पर खाद्य पदार्थ को ज्यादा फैट, ज्यादा चीनी या ज्यादा नमक वाली श्रेणी में रखा जा सकता है.
हालांकि, इन आंकड़ों को सीधे मौजूदा अंतिम फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी नियम मानना सही नहीं होगा, क्योंकि FSSAI का प्रस्ताव अभी अंतिम नियम नहीं है.
ठोस और तरल उत्पादों के लिए अलग मानक
खाने और पेय पदार्थों को एक ही पैमाने पर नहीं देखा जा सकता. तरल खाद्य पदार्थों के लिए अलग सीमाएं प्रस्तावित की गई हैं.
स्कूलों से जुड़े FSSAI के 2026 के प्रस्ताव में तरल खाद्य पदार्थों के लिए 100 मिलीलीटर में:
- 1.5 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई फैट
- 2 ग्राम से ज्यादा जोड़ी गई चीनी
- 0.175 ग्राम से ज्यादा नमक
को ज्यादा मात्रा के तौर पर देखा गया है.
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये स्कूल फूड से जुड़े प्रस्तावित मानक हैं. इन्हें अभी अंतिम फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल के नियम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.
ऐसा जरूरी नहीं है. प्रस्ताव में सिर्फ कैलोरी को देखकर हर खाद्य उत्पाद पर लाल चेतावनी लगाने की बात नहीं है. इसमें नमक, जोड़ी गई चीनी और फैट जैसे पोषक तत्वों की मात्रा को भी ध्यान में रखा जाएगा.
कुछ प्रस्तावित मानकों में दो या उससे ज्यादा पोषक तत्व निर्धारित सीमा से ऊपर होने पर चेतावनी लेबल लगाने की बात सामने आई है. वहीं कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ, जिनमें सिर्फ एक मुख्य सामग्री होती है, उन्हें इस व्यवस्था से बाहर रखा जा सकता है.
कंपनियां क्यों कर रही हैं विरोध?
फ्रंट-ऑफ-पैक चेतावनी लेबल का मुद्दा नया नहीं है. भारत में इस तरह के नियमों को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. खाद्य कंपनियों और उद्योग संगठनों की ओर से भी इस व्यवस्था को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं.
कंपनियों का तर्क है कि सिर्फ पैकेट पर लाल निशान लगाने से ग्राहक की खाने की आदतों में बड़ा बदलाव आएगा, यह मान लेना आसान निष्कर्ष है. कुछ कंपनियों का यह भी कहना है कि चेतावनी लेबल ग्राहकों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकता है.
दूसरी तरफ स्वास्थ्य विशेषज्ञ और कार्यकर्ता मानते हैं कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी देना जरूरी है. उनका तर्क है कि अगर किसी खाद्य पदार्थ में चीनी, नमक या फैट की मात्रा ज्यादा है तो इसकी जानकारी पैकेट के पीछे छोटे अक्षरों में छिपी रहने के बजाय सामने स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए.
ICMR-NIN की 2024 गाइडलाइन में क्या कहा गया?
ICMR-NIN की भारतीयों के लिए 2024 की डाइटरी गाइडलाइंस में कुल 17 दिशानिर्देश हैं. इनका मुख्य उद्देश्य बेहतर पोषण और बीमारियों से बचाव के लिए स्वस्थ खान-पान को बढ़ावा देना है.
गाइडलाइन में ज्यादा चीनी, नमक और फैट वाले भोजन को सीमित करने की सलाह दी गई है. साथ ही बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है.
इसका मतलब यह नहीं है कि हर पैकेज्ड फूड को पूरी तरह खराब या अस्वास्थ्यकर माना जाए. असल फोकस खाने की मात्रा, गुणवत्ता और पूरी डाइट के संतुलन पर है.
अगर लाल चेतावनी लेबल का प्रस्ताव लागू होता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि ग्राहक को किसी प्रोडक्ट की पोषण संबंधी अहम जानकारी खरीदारी के समय ही सामने दिखाई दे जाए. इससे वह ज्यादा सोच-समझकर अपने खाने का चुनाव कर सकेगा.