मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखना जरूरी? SC ने उठाए अहम कानूनी सवाल

KNEWS DESK- सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने के फैसले पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी और संवैधानिक सवालों पर विचार करने की जरूरत बताई है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।

महाराष्ट्र में ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने इस संबंध में महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने माना कि यह मामला आम जनता और नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है, इसलिए इसके विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार करना जरूरी है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा। एक ऑटो-टैक्सी चालक ने मराठी भाषा को अनिवार्य करने से संबंधित अधिसूचना पर बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

1 मई 2026 से लागू किया गया था नियम

महाराष्ट्र सरकार ने 1 मई 2026 से ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत मराठी में बातचीत नहीं करने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस और परमिट रद्द किए जाने का प्रावधान भी चर्चा में रहा। इस फैसले को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने अपने फैसले में राज्य सरकार की ओर से मराठी सीखने के लिए दी गई समयसीमा को एक साल बढ़ाए जाने का भी उल्लेख किया था। इसके बाद एक ऑटो-टैक्सी चालक ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विवेक शुक्ला और संजय पारिख ने दलीलें पेश कीं।

याचिकाकर्ता ने उठाए संवैधानिक सवाल

याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि मराठी भाषा को अनिवार्य करने वाली अधिसूचना संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि इस फैसले से नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और यह मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप भी नहीं है। वकीलों ने यह भी कहा कि मामला केवल एक ऑटो-टैक्सी चालक तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बड़ी संख्या में चालकों के अधिकार और हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में अधिसूचना की वैधता और उसके प्रभावों पर विस्तार से विचार किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में अब 30 नवंबर को सुनवाई

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल शामिल हैं, जिन पर विचार किया जाना जरूरी है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी कर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। राज्य सरकार के जवाब और आगे की न्यायिक कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य करने वाली अधिसूचना की संवैधानिक और कानूनी वैधता पर अदालत किस तरह विचार करती है।

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