वरुथिनी एकादशी पर पढ़ें यह व्रत कथा, इस कथा का पाठ दिलाएगा पापों से मुक्ति और देगा मोक्ष का मार्ग

KNEWS DESK- आज वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जिसे वरुथिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह पवित्र दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए समर्पित होता है। श्रद्धालु इस दिन विधि-विधान से व्रत रखकर भगवान की आराधना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने इस व्रत का विशेष महात्म्य बताया है। उन्होंने कहा कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से 10,000 वर्षों की तपस्या के बराबर फल प्राप्त होता है। यह व्रत कन्यादान के समान पुण्यदायी माना गया है। इतना ही नहीं, इस दिन व्रत कथा का पाठ करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने सभी पापों का नाश हो जाता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में राजा मान्धाता नामक एक पराक्रमी और दानशील राजा नर्मदा नदी के तट पर राज्य करते थे। वे अत्यंत धर्मपरायण और तपस्वी थे।

एक दिन राजा जंगल में ध्यान लगाकर तपस्या कर रहे थे। तभी अचानक एक जंगली भालू वहां आया और तप में लीन राजा का पैर खाने लगा। इसके बावजूद राजा अपनी साधना में अडिग रहे।

भालू राजा को घसीटकर जंगल में ले गया, लेकिन राजा ने धर्म का पालन करते हुए क्रोध नहीं किया और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और अपने चक्र से भालू का वध कर दिया। हालांकि तब तक राजा का एक पैर भालू खा चुका था, जिससे वे अत्यंत दुखी हो गए

राजा की पीड़ा देखकर भगवान विष्णु ने उन्हें मथुरा जाकर वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने और उनके वराह अवतार की पूजा करने का निर्देश दिया। साथ ही बताया कि यह घटना उनके पूर्व जन्म के कर्मों का फल थी। राजा ने भगवान की आज्ञा का पालन किया और श्रद्धापूर्वक व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें पुनः स्वस्थ और संपूर्ण अंग प्राप्त हुए।

मोक्ष और पुण्य का मार्ग

कथा के अनुसार, जीवन के अंत में राजा मान्धाता को स्वर्ग की प्राप्ति हुई। इसलिए कहा जाता है कि वरुथिनी एकादशी का व्रत करने से सभी पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

वरुथिनी एकादशी केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संयम और भक्ति का प्रतीक है। इस दिन व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। भगवान विष्णु की कृपा से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है।

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