राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित चौथ माता मंदिर करवा चौथ के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। करीब 570 साल पुराने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए भक्तों को लगभग 1000 फीट ऊंची पहाड़ी पर 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। मान्यता है कि चौथ माता की पूजा करने से सुहाग की रक्षा और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है।
Knews Desk – करवा चौथ का त्योहार सुहागन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। चौथ माता को गौरी देवी का स्वरूप माना जाता है। राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा में स्थित चौथ माता मंदिर इस पर्व पर विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।
मंदिर के इतिहास के अनुसार, इसकी स्थापना वर्ष 1451 में राजा भीम सिंह ने करवाई थी। इस तरह यह मंदिर लगभग 570 साल पुरानी धार्मिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है। मंदिर तक जाने वाले रास्ते में वर्ष 1463 में बिजल की छतरी और तालाब का निर्माण भी करवाया गया था।
करीब 1000 फीट ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है। इसकी दीवारों और छत पर बने शिलालेख पारंपरिक राजपूताना वास्तुकला की झलक दिखाते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 700 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कठिन चढ़ाई के बावजूद बड़ी संख्या में भक्त माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
चौथ माता मंदिर में माता की प्रतिमा के साथ भगवान गणेश और भैरव बाबा की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। यहां श्रद्धालु संतान प्राप्ति, सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और पति की लंबी उम्र की कामना लेकर आते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, लोग शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले चौथ माता को निमंत्रण देते हैं। चौथ माता को बूंदी राजघराने के समय से कुलदेवी के रूप में भी पूजा जाता रहा है।
चौथ माता मंदिर राजस्थान के साथ-साथ दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित करता है। चौथ का बरवाड़ा सड़क और रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। यह जयपुर से लगभग 180 किलोमीटर और सवाई माधोपुर शहर से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
चौथ माता मंदिर धार्मिक आस्था के साथ राजस्थान के इतिहास, राजपूताना स्थापत्य कला और करवा चौथ की परंपराओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है