कैंची धाम का स्थापना दिवस आज, कौन थे नीम करौली बाबा? जानिए उनके जीवन से जुड़े रहस्यमयी किस्से और चमत्कार

KNEWS DESK- उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित प्रसिद्ध कैंची धाम आज अपना 62वां स्थापना दिवस मना रहा है। हर वर्ष 15 जून को यहां विशाल भंडारे और मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार स्थापना दिवस के अगले दिन बड़ा मंगल पड़ने से श्रद्धालुओं का उत्साह और भी बढ़ गया है।

भक्तों की मान्यता है कि बाबा नीम करौली महाराज हनुमान जी के अंशावतार थे और उनकी कृपा आज भी कैंची धाम में आने वाले श्रद्धालुओं पर बनी रहती है।

कैसे हुई कैंची धाम की स्थापना?

बताया जाता है कि बाबा पहली बार वर्ष 1961 में इस स्थान पर पहुंचे थे। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक वातावरण से प्रभावित होकर उन्होंने आश्रम निर्माण का संकल्प लिया। इसके बाद 15 जून 1964 को कैंची धाम की विधिवत स्थापना हुई।

तब से लेकर आज तक हर वर्ष स्थापना दिवस पर विशाल भंडारे का आयोजन होता है, जहां लाखों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं।

कौन थे नीम करौली बाबा?

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में माना जाता है। उनका बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। छोटी उम्र से ही उनका झुकाव अध्यात्म और साधना की ओर था।

उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा, भक्ति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन को समर्पित कर दिया। उनकी सादगी ऐसी थी कि वे हमेशा एक साधारण कंबल ओढ़े रहते थे। इसी कारण उन्हें “कंबल वाले बाबा” भी कहा जाता था।

कैंची धाम के भंडारे की अनोखी मान्यता

स्थापना दिवस पर आयोजित होने वाला भंडारा पूरे देश में प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां कभी प्रसाद की कमी नहीं पड़ती।

कहा जाता है कि चाहे भक्तों की संख्या कितनी भी बढ़ जाए, हर व्यक्ति को प्रसाद अवश्य मिलता है। यहां मिलने वाला मालपुआ प्रसाद विशेष रूप से लोकप्रिय है, जिसे लोग बाबा का आशीर्वाद मानकर ग्रहण करते हैं।

नीम करौली बाबा से जुड़े चर्चित चमत्कार

जब पानी बन गया देसी घी

कैंची धाम में आयोजित एक भंडारे के दौरान अचानक घी खत्म हो गया। सेवादारों की चिंता देखकर बाबा ने पास की नदी से पानी लाने को कहा। मान्यता है कि जैसे ही वह पानी कड़ाही में डाला गया, वह शुद्ध देसी घी में बदल गया और उसी से पूरा प्रसाद तैयार किया गया। इस घटना का उल्लेख आज भी श्रद्धालु श्रद्धा के साथ करते हैं।

ट्रेन रुकने की रहस्यमयी घटना

सबसे चर्चित कथाओं में से एक ट्रेन वाला प्रसंग है। बताया जाता है कि एक बार बिना टिकट यात्रा करने के कारण बाबा को ट्रेन से उतार दिया गया था। जैसे ही बाबा स्टेशन पर उतरे, ट्रेन आगे नहीं बढ़ सकी। रेलवे कर्मचारियों ने काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में बाबा से क्षमा मांगकर उन्हें वापस ट्रेन में बैठाया गया, जिसके बाद ट्रेन तुरंत चल पड़ी। यही घटना आगे चलकर उन्हें “नीम करौली बाबा” नाम से प्रसिद्ध करने का कारण बनी।

साधारण जल बना गंगाजल

एक भक्त गंभीर बीमारी से पीड़ित था। कहा जाता है कि बाबा ने एक लोटे में साधारण पानी मंगवाया और उसे आशीर्वाद देकर भक्त को पिलाया। भक्त ने उस जल को गंगाजल जैसा अनुभव किया और कुछ समय बाद उसकी तबीयत में चमत्कारिक सुधार देखने को मिला। श्रद्धालु इस घटना को बाबा की दिव्य कृपा मानते हैं।

विदेशों में भी है बाबा की अपार लोकप्रियता

नीम करौली बाबा की ख्याति केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया भर से लोग उनकी शिक्षाओं और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरणा लेने कैंची धाम पहुंचते हैं। उनके प्रेम, सेवा और भक्ति के संदेश ने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है।

कैंची धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, सेवा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। स्थापना दिवस के अवसर पर यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ बाबा नीम करौली महाराज के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा का प्रमाण है। आज भी लाखों भक्त मानते हैं कि सच्चे मन से बाबा को याद करने पर उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

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