KNEWS DESK- छठ महापर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और आस्था से जुड़ा पर्व है। इस पर्व में प्रकृति, अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। छठ के दौरान व्रती 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखते हैं और डूबते व उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
छठ का यह महापर्व साल में दो बार मनाया जाता है। कार्तिक माह और चैत्र माह में। चैत्र मास में पड़ने वाले इस पर्व को चैती छठ कहा जाता है, जो चार दिनों तक चलता है।
चैती छठ की शुरुआत: नहाय-खाय से हुआ शुभारंभ
चैती छठ महापर्व की शुरुआत 22 मार्च को नहाय-खाय के साथ हुई। इस दिन व्रती स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरा के अनुसार कद्दू की सब्जी, चने की दाल और चावल का प्रसाद बनाकर खाया जाता है, जिससे व्रत की शुद्ध शुरुआत होती है।
आज है खरना: व्रत का दूसरा और महत्वपूर्ण दिन
आज छठ महापर्व का दूसरा दिन यानी खरना है। ‘खरना’ का अर्थ होता है शुद्धता और पवित्रता। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं और शाम को विशेष पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
खरना के दिन पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है ताकि पूजा में कोई बाधा न आए। इस दिन मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियों से प्रसाद बनाया जाता है, जो इस पर्व की परंपराओं को और खास बनाता है।
खरना के बाद शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला व्रत
खरना के दिन शाम को पूजा और प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रतियों का 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास शुरू हो जाता है। 24 मार्च डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य दिया जाएगा। 25 मार्च उगते सूर्य को ऊषा अर्घ्य देकर व्रत का पारण होगा। इसी के साथ चैती छठ महापर्व का समापन हो जाएगा।
खरना पूजा विधि: कैसे करें सही तरीके से पूजा
खरना के दिन विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिए इन चरणों का पालन करें:
सुबह की तैयारी
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
दिनभर का व्रत
सूर्योदय से सूर्यास्त तक कुछ भी न खाएं और न ही पानी पिएं।
पूजा स्थल की शुद्धि
घर के पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।
संध्या पूजा
सूर्यास्त के बाद स्नान करके नए या साफ कपड़े पहनें।
प्रसाद की तैयारी
मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ियों से गुड़, चावल और दूध की खीर बनाएं। साथ ही घी लगी रोटी भी तैयार करें।
भोग अर्पण
खीर, रोटी और फल छठी मैया और सूर्य देव को अर्पित करें।
प्रसाद ग्रहण
सबसे पहले व्रती स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
छठ महापर्व का महत्व
छठ पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मसंयम, प्रकृति के प्रति आभार और शुद्धता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से सुख-समृद्धि, संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है।
चैती छठ का यह पावन पर्व भक्ति, अनुशासन और आस्था का अद्भुत उदाहरण है। खरना के दिन से शुरू होने वाला 36 घंटे का निर्जला व्रत व्रती की श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है। इस महापर्व के माध्यम से सूर्य देव और छठी मैया की कृपा प्राप्त करने का अवसर मिलता है।