उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों का इंतजार बेसब्री से हो रहा है, प्रदेशभर में इन दिनों सभी राजनीतिक दलों की तैयारियां चरम पर चल रही हैं. तैयारियों के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज है.और बड़े बड़े आयोजन लगातार हो रहे हैं. राज्य में अब तक हर चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही देखने को मिला है.वही लगातार नौ साल से अधिक समय से प्रदेश की सत्ता में काबिज भाजपा के लिए हमेशा हिंदुत्व और सनातन का मुद्दा सर्वोपरि रहा है,लेकिन आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है. इस बार बहस सनातन या सांप्रदायिकता की नहीं, बल्कि उत्तराखंड में बाहर से आने वाले हुड़दंगियों को लेकर हो रही है और कानून व्यवस्था व बाहरी लोगों के व्यवहार पर उठ रहे सवाल आगामी चुनावो के लिए बढ़िया मुद्दे के रूप में सामने दिखाई पड़ रहा हैं,जिससे राजनीति में नई तरह की हलचल दिख रही है.आपको बता दे,जहाँ एक ओर भाजपा और कांग्रेस आपस में एक दूसरे को चुनौती देने का कार्य कर रही है, वही उत्तराखंड क्रांति दल राज्य से जुड़े मुद्दों को लेकर मैदान में उतर चुका है,साधारण भाषा में कहे तो इस बार सत्ताधारी सरकार भाजपा के सामने कांग्रेस नहीं, बल्कि उत्तराखंड क्रांति दल काफी बड़ी चुनौती खड़ा कर रहा है.भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल जहां बचकर चल रहे हैं,वहीं यूकेडी ने स्थानीयता का मुद्दा मिलते ही मिशन 2027 के लिए कड़ा प्रयास शुरू कर दिया है.पिछले कुछ महीनों में कई घटनाओं ने स्थानीयता बनाम बाहरी प्रभाव की बहस छेड़ने जैसे हालात बनाये जिसको लेकर यूकेडी ने इसे मौके की तरह लिया और खुद को उत्तराखंड के हितों की आवाज के रूप में पेश करना शुरू कर दिया.राज्य गठन में अहम भूमिका निभाने वाली यूकेडी को लेकर अनुमान है कि 2027 की कमान उसके हाथ आ सकती है. हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही जीत के दावे कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में बाजी यूकेडी के हाथ में भी दिख रही है. जिसको लेकर राजनीतिक गलियारो में आपसी बहस देखने को मिल रही है.
आगामी 2027 की जीत के लिए हर राजनीतिक दल ऐड़ी चोटी का जोर लगातार नजर आ रहा है. एक तरफ प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भाजपा सरकार को घेरने के लिए परिवर्तन संकल्प यात्रा से आम जनता के बीच जुड़ने का प्रयास कर रही है,तो वहीं भाजपा भी हर समय चुनावी मूड में रहने वाली इस बार भी प्रचंड जीत का लक्ष्य लेकर चल रही है.साथ ही तीसरे मोर्चे की तरफ देखने वाली बात है,तो यूकेडी इस बार खास तौर से पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी अहम भूमिका आम जनता के मुद्दों को लेकर बनाने में जुटी है.सवाल यही बनता है,कि हर कोई अपनी अपनी प्रचंड जीत का दावा पूरे गर्व से करता नजर आ रहा है.जो जानकारों के मुताबिक त्रिकोणीय इस बार का चुनावी दंगल बेहद दिलचस्प होने वाला है.
कुल मिलाकर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड की सियासत में बड़ा बदलाव साफ दिख रहा है. अब तक भाजपा कांग्रेस की सीधी टक्कर वाले प्रदेश में इस बार यूकेडी स्थानीयता के मुद्दे पर आक्रामक है. बाहरी लोगों की हुड़दंग और कानून व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं ने क्षेत्रीय भावनाओं को हवा दी है. यूकेडी इसे मिशन 2027 के लिए सबसे बड़ा हथियार बना रही है. राज्य गठन का श्रेय लेने वाली पार्टी खुद को फिर से उत्तराखंड की असली आवाज बता रही है. हालांकि भाजपा हिंदुत्व और विकास के दम पर हैट्रिक का दावा कर रही है, वहीं कांग्रेस भी वापसी को लेकर आश्वस्त है.लेकिन जमीनी माहौल बता रहा है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर यूकेडी ने स्थानीयता का यह मुद्दा अंत तक संभाले रखा तो चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं, लेकिन फिलहाल सभी दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं।