डिजिटल डेस्क- राजस्थान के शिक्षा और पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने गाय और भैंस के दूध को लेकर तुलना करते हुए दावा किया कि गाय का दूध पीने वाला बच्चा अधिक बुद्धिमान और चंचल होता है, जबकि भैंस का दूध पीने से बुद्धि प्रभावित होती है। मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यदि 5-7 ऐसी गायें और भैंसें चुनी जाएं, जिन्होंने 3-4 दिन पहले ही बच्चों को जन्म दिया हो, और उनके बच्चों को एक साथ छोड़ दिया जाए, तो भैंस का बच्चा अपनी मां को ढूंढने में समय लगाएगा, जबकि गाय का बछड़ा सीधे अपनी मां के पास पहुंच जाएगा। इसी उदाहरण के आधार पर उन्होंने कहा कि “गाय का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धिमान होता है और भैंस का दूध पीने वाला बच्चा बुद्धि से भ्रष्ट होता है।”
बच्चों को चंचल, समझदार बनाना है तो गाय का दूध पिलाए- मंत्री दिलावर
उन्होंने आगे कहा कि यदि माता-पिता अपने बच्चों को चंचल, समझदार और तरक्की करने वाला बनाना चाहते हैं, तो उन्हें गौ माता का दूध पिलाना चाहिए। मंत्री ने बछड़ों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अलग-अलग भाषाई अभिव्यक्तियों का भी जिक्र करते हुए गाय के महत्व पर जोर दिया। मदन दिलावर के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे भारतीय परंपरा और गौ-पालन के समर्थन में बताया जा रहा है, तो वहीं कई यूजर्स और विशेषज्ञ इसे वैज्ञानिक आधार से परे मानते हुए आलोचना कर रहे हैं।
14 गांवों में पारंपरिक गौ-चराई व्यवस्था फिर से शुरू करने की घोषणा
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने 14 गांवों में पारंपरिक गाय चराने की व्यवस्था को फिर से शुरू करने की घोषणा भी की। प्रस्ताव के अनुसार, हर 70 गायों पर एक ग्वाला नियुक्त किया जाएगा। यदि संख्या 70 से अधिक होती है तो दो ग्वाले रखे जाएंगे। एक अधिकारी के मुताबिक, प्रत्येक ग्वाले को हर महीने 10,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा। इस व्यवस्था के लिए गांव के दानदाताओं (भामाशाह) से सहयोग लिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक पशुपालन प्रणाली को मजबूत करना और गौ-संरक्षण को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।