बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, देश-विदेश से पहुंचे हजारों भक्त, बंटा मालपुए का विशेष प्रसाद

कान्ता पाल- विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र ‘कैंची धाम’ के स्थापना दिवस के पावन अवसर पर आज सोमवार को भवाली-नैनीताल हाईवे पर स्थित बाबा नीम करौली के आश्रम में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। बाबा के इस पावन धाम में सुबह तड़के से ही देश और विदेश के कोने-कोने से आए हजारों भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। मान्यता है कि जो भी भक्त बाबा नीम करौली के दर पर सच्ची आस्था लेकर आता है, वह कभी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। स्थापना दिवस के इस विशेष मौके पर पूरे परिसर को भव्य तरीके से सजाया गया है और चारों तरफ सिर्फ बाबा के जयकारे गूंज रहे हैं।

बाबा के पसंदीदा ‘मालपुए’ का वितरित हुआ महाप्रसाद

कैंची धाम स्थापना दिवस मेले के दौरान आज मंदिर प्रबंधन और वॉलिंटियर्स द्वारा सभी श्रद्धालुओं को बाबा के प्रिय ‘मालपुए’ का विशेष प्रसाद वितरित किया गया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नीम करौली बाबा को मालपुए बेहद प्रिय थे। यही वजह है कि हर साल 15 जून को आयोजित होने वाले इस विशाल मेले में आने वाले हर एक भक्त को बेहद आदर के साथ मालपुए का महाप्रसाद बांटा जाता है, जिसे ग्रहण करने के लिए लोग घंटों कतारों में खड़े रहते हैं। नीम करौली बाबा की अलौकिक महिमा सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सात समंदर पार विदेशों तक फैली हुई है। जब दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे थे, तब उन्होंने कैंची धाम आकर बाबा का आशीर्वाद लिया था। इसके बाद फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली व अभिनेत्री अनुष्का शर्मा जैसी कई जानी-मानी वैश्विक हस्तियां भी बाबा के दरबार में शीश नवा चुकी हैं।

15 जून 1964 को हुई थी पावन धाम की स्थापना

कैंची धाम के इतिहास और इस मेले की शुरुआत के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। भवाली के कैंची गांव में इस पवित्र धाम की स्थापना जून 1964 में की गई थी। इतिहास के अनुसार, साल 1962 में नीम करौली बाबा ने पहली बार कैंची गांव के स्थानीय निवासी पूर्णानंद से मुलाकात की थी और उनके सामने सोमबारी महाराज के प्राचीन निवास को देखने की इच्छा प्रकट की थी। काफी खोजबीन के बाद सोमबारी महाराज की यज्ञशाला ढूंढी गई, जहां साफ-सफाई करने के बाद एक भव्य चबूतरा तैयार किया गया। इसी पवित्र चबूतरे पर हनुमान जी के मंदिर का निर्माण किया गया और 15 जून 1964 को मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। तभी से हर साल इस तारीख को स्थापना दिवस और भव्य मेले के रूप में मनाया जाता है।

लक्ष्मी नारायण से ‘हनुमान अवतार’ बनने तक का सफर

बाबा नीम करौली को उनके भक्त साक्षात संकटमोचन हनुमान जी का अवतार मानते हैं। बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अंतर्गत आने वाले अकबरपुर गांव में हुआ था और उनके बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था। उन्होंने अपने चमत्कारों और सादगी से करोड़ों लोगों का जीवन बदल दिया। जन-जन के दुखों को दूर करने वाले नीम करौली महाराज ने साल 1973 में उत्तर प्रदेश के वृंदावन धाम में अपने प्राण त्यागे थे, लेकिन आज भी भक्तों का मानना है कि बाबा अदृश्य रूप में कैंची धाम में ही वास करते हैं।

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