जेवर एयरपोर्ट से उड़ान की उल्टी गिनती शुरू, मई के अंत से घरेलू फ्लाइट्स होंगी उपलब्ध, पश्चिमी यूपी में घूमेगा विकास का पहिया

डिजिटल डेस्क- पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास को नई रफ्तार देने वाला बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब अपने संचालन के बेहद करीब पहुंच गया है। देश के सबसे महत्वाकांक्षी एविएशन प्रोजेक्ट्स में शामिल यह एयरपोर्ट मई के अंत तक घरेलू और कार्गो उड़ानों के साथ अपनी शुरुआत कर सकता है। हाल ही में यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में इस दिशा में बड़ा फैसला लिया गया, जिसके बाद तैयारियों ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। एयरपोर्ट प्रशासन ने पहले चरण में 17 घरेलू रूट्स पर उड़ानें शुरू करने की योजना बनाई है। हालांकि अभी इन शहरों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, लखनऊ जैसे बड़े शहरों के साथ उत्तर भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्र इसमें शामिल होंगे। यात्रियों को सस्ती और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के लिए शुरुआत में लो-कॉस्ट एयरलाइंस को प्राथमिकता दी जा रही है। तीन प्रमुख एयरलाइन कंपनियों के साथ प्रारंभिक बातचीत भी पूरी हो चुकी है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एटरपोर्ट

तकनीकी रूप से यह एयरपोर्ट अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। यहां का रनवे और एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम इस तरह डिजाइन किया गया है कि हर दो मिनट में एक विमान टेक-ऑफ या लैंड कर सकेगा। यह क्षमता इसे दुनिया के अग्रणी एयरपोर्ट्स की श्रेणी में खड़ा करती है। साथ ही, अगले दो वर्षों में विमानों की पार्किंग के लिए 25 नए स्टैंड विकसित किए जाएंगे, जिन पर करीब 300 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। फिलहाल 28 स्टैंड तैयार हैं। यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए बिजनेस क्लास लाउंज, प्रीमियम वेटिंग एरिया और आधुनिक सुविधाओं का भी तेजी से विकास किया जा रहा है। एयरपोर्ट परिसर में एक भव्य होटल का निर्माण भी जारी है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

सुरक्षा और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया अंतिम चरणों में

सुरक्षा और लाइसेंसिंग के मोर्चे पर भी काम अंतिम चरण में है। एरोड्रम लाइसेंस और अन्य सुरक्षा मंजूरियों के लिए प्रक्रिया तेज कर दी गई है। यमुना प्राधिकरण के सीईओ डॉ. अरुण वीर सिंह के अनुसार, गृह मंत्रालय द्वारा उठाई गई तकनीकी आपत्तियों का समाधान लगभग कर लिया गया है और जल्द ही सभी आवश्यक क्लीयरेंस मिलने की उम्मीद है। इसके बाद उड़ानों के संचालन में कोई बाधा नहीं रहेगी। यह एयरपोर्ट केवल एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक क्रांति का केंद्र बनने जा रहा है। कार्गो उड़ानों की शुरुआत से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़ और आगरा के निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक सीधी पहुंच मिलेगी। इससे लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और व्यापार को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।