रामचरित मानस पर स्वामी प्रसाद के विवादित बयान पर सपा नेताओं में रार, कुछ नेता समर्थन में तो कुछ है नाराज

के-न्यूज/लखनऊ, सपा नेता स्वामी प्रसाद के रामचरित मानस पर विवादित बयान को लेकर यूपी में राजनीति तेज हो गई हैं. सपा भी इस बयान को लेकर दो गुटों में बट गई है. जहां एक तरफ कुछ नेता इस बयान का समर्थन कर रहे है तो वही दूसरी ओर कई नेता स्वामी प्रसाद से नराज नजर आ रहे हैं. लेकिन इस विवादित बयान पर अभी तक सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश सिंह यादव ने किसी तरीके की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी हैं. ये अखिलेश यादव का कोई दांव हैं या वो स्वामी प्रसाद से नाराज हैं ?

बिहार के शिक्षा मंत्री के बाद सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का रामचरित मानल को लेकर दिया गया बयान कोई गलती नही हैं. बल्कि ये बयान उन्होंने बहुत सोच समझ कर दिया हैं. इन्होंने सिर्फ बयान में रामचरित मानस को बकवास नही कहा हैं. बल्कि रामचरित मानस से उन सभी चौपाइयों को हटाने की मांग की हैं. जिसमें दलित की बात की गई हैं. इस बयान को लेकर सपा भी दो गुटों में बटा नजर आ रहा है. जहां एक तरफ शिवपाल यादव ने खुद को इस बयान से अलग से लिया हैं. वही सपा के स्वर्ण नेता स्वामी के इस बयान से नाराज नजर आ रहे है.

 

स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से स्वर्ण नेतओं में नाराजगी

स्वामी प्रसाद के विवादित बयान के बाद सपा के स्वर्ण नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है. सपा के ठाकुर और ब्राह्मण नेताओं ने स्वामी के विवादित बयान के खिलाफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव से शिकायत की थी. सपा विधायक संतोष पांडेय ने रामचरित मानस के महत्व और हिंदू धर्म में उसके महत्व के बारे में बताया. जिसके बाद सभी स्वर्ण नेताओं ने अखिलेश यादव के पास जा कर अपनी नाराजगी को दर्ज कराया है.

शिवपाल ने बयान से किया किनारा

वहीं, सपा नेता शिवपाल यादव और रविदास मेहरोत्रा ने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से किनारा कर लिया और उनका निजी बयान बताकर पल्ला झाड़ लिया है. शिवपाल ने कहा कि समाजवादी पार्टी स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान से सहमत नहीं है. ये उनका अपना व्यक्तिगत बयान है पार्टी का इससे कोई लेना देना नहीं. हमलोग भगवान राम और कृष्ण के आदर्शों पर चलने वाले लोग हैं. इसके साथ ही उन्होंने सवाल खड़े करते हुए काह कि क्या बीजेपी भगवान राम के बताए रास्ते में चलने वाली पार्टी है.

सॉफ्ट हिंदूत्व राह पर चल रहे अखिलेश

सपा के राष्ट्रीय के अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने कोर वोट बैंक यादव और मुस्लिम वोट को साधे रहना चाहते हैं. इसलिए स्वामी के प्रसाद के बयान को लेकर ज्यादा प्रतिक्रिया नही देना चाहते हैं. वही दूसरी ओर वो बदलते हुए राजनीति समीकरण को बेखूबी से समझ रहे हैं. बीजेपी के हार्ड हिंदूत्व का जवाब वो अपने सॉप्ट हिंदूत्व से देना चाहते हैं. इसलिए वो चाहते हैं कि वो ऐसी कोई भी प्रतिक्रिया ना दें. जिससे हिंदू वोट उनसे नाराज हो जाए. हिंदू वोट को खुश करने के लिए वो पशुराम जी की मूर्ति का अनावरण कर चुके है.

 

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