Knews Desk– अयोध्या के एक और मंदिर से जुड़ी संपत्ति को लेकर विवाद सामने आया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर श्री राम निवास मंदिर, बरहटा, रामकोट (अयोध्या) की संपत्तियों में कथित अनियमितता और गबन के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता हरिशंकर सफरीवाला ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने मंदिर की देवोत्तर संपत्ति को बेचने का सौदा किया और इससे जुड़ी धनराशि का दुरुपयोग किया। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हरिशंकर सफरीवाला का दावा है कि वह श्री राम निवास मंदिर की पंच समिति के प्रमुख हैं। उनके अनुसार, तत्कालीन महंत रामगोपाल दास ने 30 दिसंबर 1987 को उन्हें यह जिम्मेदारी दी थी। बाद में 2 फरवरी 2018 को मंदिर प्रबंधन को पंजीकृत कराया गया, जिसमें उन्हें मुख्य कार्यपालक एवं प्रशासनिक प्रमुख बताया गया। शिकायत के मुताबिक, 11 अगस्त 2021 को उन्होंने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए वीरेंद्र दास उर्फ वीरू को मंदिर का महंत नियुक्त किया था। नियुक्ति पत्र में यह शर्त रखी गई थी कि समिति की अनुमति के बिना मंदिर की किसी भी संपत्ति का विक्रय नहीं किया जा सकता।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद मंदिर और उसकी भूमि को लगभग 5 करोड़ 80 लाख रुपये में बेचने का प्रयास किया गया। उनका कहना है कि संबंधित दस्तावेजों में जमीन को देवोत्तर संपत्ति बताया गया था, जिसे कानूनी रूप से बेचने पर रोक होती है। आरोप है कि इस सौदे के लिए 70 लाख रुपये पेशगी के रूप में दिए गए, लेकिन यह रकम मंदिर के खाते में जमा नहीं हुई। हरिशंकर सफरीवाला ने यह भी आरोप लगाया है कि मंदिर परिसर में पंच समिति के सदस्यों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और कार्यालय समेत अन्य सामान पर कब्जा कर लिया गया। शिकायत में मंदिर की मूर्तियों, आभूषणों, सोने की परत वाले पलंग और चांदी-सोने के बर्तनों के संबंध में भी जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि मंदिर के देवी-देवताओं के आभूषणों का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संबंध में नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके अलावा मंदिर की दुकानों और भवनों से जुड़े किरायेदारों से कथित रूप से नकद वसूली का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि इन लेन-देन का उचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
एसआईटी से की गई मांगों में मंदिर का प्रबंधन मूल समिति को वापस सौंपना, मंदिर की संपत्तियों और आभूषणों की जांच कराना, कथित रूप से ली गई 70 लाख रुपये की राशि वापस जमा कराना और पूरे मामले में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करना शामिल है। शिकायतकर्ता ने नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग भी की है। अब एसआईटी जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।