सारिका गुप्ता- उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित प्रतिष्ठित नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट परिसर में पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध पेड़ कटान के मामले में केंद्र सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाया है। संस्थान के परिसर में बिना अनुमति के 722 हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटे जाने के गंभीर मामले में एनएसआई (NSI) की निदेशक डॉ. सीमा परोहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की ओर से डॉ. सीमा परोहा के निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। केंद्र सरकार की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे सहित देश के चीनी उद्योग से जुड़े हलकों में हड़कंप मच गया है।
नए निदेशक को सौंपा गया अतिरिक्त कार्यभार
निदेशक डॉ. सीमा परोहा के निलंबन के बाद संस्थान के कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के तहत, शुगर एंड वेजिटेबल ऑयल निदेशालय के निदेशक अरविंद कुमार रावत को नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के निदेशक पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है। वह अगले आदेश तक संस्थान की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्थाओं की कमान संभालेंगे।
कल्याणपुर थाने में दर्ज है आपराधिक मुकदमा
यह पूरा मामला तब गरमाया जब पर्यावरण की अनदेखी कर संस्थान परिसर के भीतर सैकड़ों की संख्या में फलदार और छायादार हरे पेड़ काट दिए गए। इस गंभीर कृत्य को लेकर वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कड़ी आपत्ति जताई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में ही डॉ. सीमा परोहा सहित संस्थान के अन्य संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानपुर के कल्याणपुर थाने में भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश वृक्ष संरक्षण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अधिकारियों पर पद का दुरुपयोग करने और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप हैं। इस मामले में अब कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। वर्तमान में कानपुर पुलिस और वन विभाग की संयुक्त टीमें मिलकर इस पूरे घोटाले की गहनता से जांच कर रही हैं। वन विभाग इस बात का आकलन कर रहा है कि काटे गए पेड़ों की वास्तविक कीमत और पर्यावरण को हुई क्षति कितनी बड़ी है, वहीं पुलिस इस अवैध कटान के पीछे के आर्थिक लेन-देन और ठेकेदारों की भूमिका की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।