आश्वासन के 30 दिन बीते..लेकिन नहीं पूरी हुई मांगे. कागजी आश्वासन से कर्मचारियों में रोष 

के न्यूज़ (लखनऊ)- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र की मंगलवार को सम्पन्न बैठक में बीते 1 माह पूर्व हुए समझौते को लेकर रोष व्यक्त किया कर्मचारियों का कहना है कि यदि आला अधिकारियों ने कर्मचारियों को ऐसे ही गुमराह किया तो यह विरोध प्रदर्शन फिर एक बार आंदोलन का रूप लेगा …सभी कर्मचारियों ने ऊर्जा मंत्री से अपील की है कि वह दिए गए आश्वासन को शीर्ष अधिकारियों से जल्द लागू करने के निर्देश दें… कर्मचारियों ने आला अधिकारियों के इस रवैया को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा की समझौते के 01 माह बाद भी किसी भी बिन्दु का अनुपालन नहीं किया गया।

इसको लेकर आज प्रदेश भर में विरोध सभा की गयी एवं समिति के समस्त सदस्यों द्वारा सर्वसम्मति से शीर्ष प्रबन्धन की घोर निन्दा करते हुए उप्र सरकार के ऊर्जा मंत्री से यह अपील की गयी कि आपस में हुए समझौते को तत्काल लागू किये जाने को लेकर ऊर्जा निगमों के शिखर प्रबन्धन को कड़े निर्देश जारी किये जाये।

बिजली कर्मचारियों की मुख्य मांगे..

1…सभी बिजली कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाए

 

2…ट्रांसफार्मर वर्कशॉप के निजीकरण के आदेश को जल्द वापस लिया जाए

आगरा फ्रेंचाइजी व ग्रेटर नोएडा का निजीकरण रद्द किया जाए

 

3…निर्धारित चयन प्रक्रिया के अंतर्गत प्रबंध निदेशक, चेयरमैन व निदेशक के पदों पर चयन किया जाए

4…9 वर्ष कुल 14 वर्ष एवं कुल 19 वर्ष की सेवा के बाद 3 प्रमोशन वेतनमान दिया जाए

5…बिजली कर्मचारियों को कई वर्षों से लंबित बोनस के भुगतान को भी जल्द किया जाए

 

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, जय प्रकाश, जीवी पटेल, गिरीश पाण्डेय, सदरूद्दीन राना, राजेन्द्र घिल्डियाल,  आर.के. सिंह ने आज जारी बयान में बताया कि ऊर्जा मंत्री व मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के साथ बीते तीन दिसंबर को हुए लिखित समझौते का आज एक माह पूरा हो गया है और ऊर्जा निगमों के शीर्ष प्रबंधन खासकर चेयरमैन के स्वेच्छाचारी रवैया में कोई परिवर्तन नहीं है।