राम मंदिर दान घोटाले की जांच तेज, आज मुख्यमंत्री को मिल सकती है SIT रिपोर्ट

Knews Desk- अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे के कथित गबन मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इस मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप सकती है। पिछले छह दिनों से अयोध्या में डेरा डाले SIT ने दान, जमीन खरीद, निर्माण सामग्री की खरीद और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई अहम पहलुओं की गहन जांच की है।

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, SIT ने अपनी पड़ताल के दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों और दान प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की है। जिन लोगों से पूछताछ की गई है, उन्हें अगले आदेश तक अयोध्या नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है। ट्रस्ट के एक अधिकारी ने बताया कि जांच अभी जारी है और आवश्यकता पड़ने पर इन लोगों से दोबारा पूछताछ की जा सकती है।

SIT की जांच केवल दान राशि की कथित हेराफेरी तक सीमित नहीं रही, बल्कि ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में की गई खरीद और मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्रियों की भी जांच की गई है। सूत्रों के अनुसार, मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई लगभग 71 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई है। आरोप है कि कुछ जमीनों की खरीद बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर की गई थी, जिसकी जांच की जा रही है।

जांच के दौरान करीब 150 संदिग्ध लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से लगभग 25 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। SIT ने CCTV फुटेज, दान पेटियों से प्राप्त धनराशि, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और बैंक में राशि जमा कराने की व्यवस्था की भी बारीकी से जांच की है। सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य अब लखनऊ पहुंचा दिए गए हैं।

सूत्रों का दावा है कि कथित गबन का बड़ा हिस्सा वर्ष 2025 की शुरुआत में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान हुआ था, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। SIT इस दौरान दान राशि के प्रबंधन और उसके उपयोग में हुई संभावित अनियमितताओं की भी जांच कर रही है।

प्रारंभिक रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन, किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने, दान राशि के साप्ताहिक ऑडिट और नकदी की प्रतिदिन डिजिटल एंट्री सुनिश्चित करने की सिफारिश की जा सकती है। इसके अलावा CCTV कैमरों के डाटा स्टोरेज की अवधि 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने और ट्रस्ट संचालन में पारदर्शिता बढ़ाने की भी सलाह दी गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *