मंत्रियों का दर्द उभरा तो UP के ‘महाराज’ ने तुरंत किया इलाज,एक्शन में आए CM योगी,ताश के पत्ते की तरह बिखरे बड़े- बड़े ब्यूरोक्रेट

ब्यूरोक्रेसी में हुए बदलाव का मायने क्या है ?

जमे जमाए बड़े- बड़े ब्यूरोक्रेट ताश के पत्ते की तरह बिखर गए

साइडलाइन किए गए अधिकारियों की गतिविधियों की रिपोर्ट पहले से ही पहुंच रही थी मुख्यमंत्री के पास

मंत्री बनाम अफसरों का टकराव भी माना जा रहा है इस बडे प्रशासनिक फेरबदल का कारण

एक तेजतर्रार अफसर के रिटायर्ड होने के बाद बड़े स्तर पर हुए बदलाव की क्या है कहानी

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी के रिटायर्ड होने के बाद ब्यूरोक्रेसी में चल रही मनमानी पर पूरी तरह से विराम लग गया जमे जमाए अफसरों को किया गया साइडलाइन, लो प्रोफाइल और कामकाजी अफ़सरों को क्रीम तैनाती दी गई।

दर्द उभरा तो मुख्यमंत्री ने तुरंत शुरू किया इलाज,नासूर नही बनने दिया

उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में उच्च स्तर पर बड़े बदलाव की पटकथा उसी दिन लिखनी शुरू हो गई थी जब मंत्रियों और अफसरों की लड़ाई खुलकर सामने आने लगी थी । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस समय विवादों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले जिम्मेदारों को नापने पर ध्यान दिया कड़ी और आगे बढ़ी तो कई की कुर्सी ही खिसकजिसका अंदाजा भी नही था उन अफसरों को,हालांकि इन बदलावों में कुछ ऐसे ब्यूरोक्रेट्स है जो अर्श से फर्श पर आ गए जिनकी दूर-दूर तक चर्चा नहीं थी लंबे समय से वह दिन बहुरने का इंतजार कर रहे थे धार्मिक स्थलों के साथ-साथ राजनेताओं के द्वार पर मत्था भी देख रहे थे, कुछ अफसरों को राहत भी मिली सत्ता के गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कुछ बदलाव भले ही चौकाने वाले लग रहे हैं लेकिन किनारे लगाए गए अफसरों के कामकाज व गतिविधियों की रिपोर्ट पहले से उच्च स्तर पर मुख्यमंत्री तक पहुंच रही थी जिसने इस बदलाव की जमीन तैयार की और आखिरकार मुख्यमंत्री तक पहुंची रिपोर्ट सच साबित हुई और बड़े-बड़े अफसर साइडलाइन कर दिए गए।

योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल शुरुआत ही एक्शन से भरी रही। पहले कार्यकाल में अधिकारियों के हावी होने का लगातार आरोप लगते रहे थे ,दोबारा जनादेश हासिल करने के बाद योगी ने अंदाज बदला ,शक्त प्रशासक का रूप दिखाया। काम में लापरवाही भ्रस्टाचार में लिप्त के आरोप में दो जिलाधिकारी , 2 आईपीएस अधिकारियो को सस्पेंड किए ,सीएम ने अपने दोनों कार्यकाल में ऐसा पहली बार किया , जब सीधे आईएएस अफसर सस्पेंड किए। इसके पहले तक की कार्रवाई केवल प्रमोटी अफसरों पर ही हुई थी डायरेक्ट आईएएस अधिकारियों पर इस तरह की पहली कार्रवाई सीएम योगी ने किया, इसके तुरंत बाद 2 आईपीएस अफसरों के साथ ही डीजीपी को हटाकर मुख्यमंत्री ने सख्त तेवर का सीधा संदेश दे दिया। जिससे ब्यूरोक्रेसी में हलचल मच गई इसके बाद अफसरशाही का रवैया ठीक ठाक चला लेकिन सरकार के 100 दिन पूरे होते होते फिर मर्ज उभरने लगा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाशूर बनने से पहले अपने सख्त प्रशासक वाला रूप दिखाया और इलाज किया जिसका परिणाम कई अफसरों को साइडलाइन कर दिया, लो प्रोफाइल कामकाजी अफसरों को पोस्टिंग देकर यह संदेश दे दिया की इधर उधर करने वाले अधिकारी नहीं काम करने वाले अफसर ही सही सीट पर बैठेंगे।

 

सालों से जमे जमाए अफसर उखड़ गए अंदाजा भी नहीं था

बदले गए अफसरों की संख्या भले ही कम हो लेकिन उसका प्रभाव वह विस्तार बड़ा है अमित मोहन प्रसाद फरवरी 2020 में स्वास्थ्य महकमे में आए थे तब से वह वहीं जमे थे गोभी की दूसरी लहर के दौरान उस समय के कानून मंत्री और वर्तमान में उप मुख्यमंत्री के साथ स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने चिट्ठी लिखकर सवाल उठाए थे लेकिन अमित मोहन लहर पार कर गए , लेकिन शायद अमित मोहन प्रसाद को अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि उसी जनसेवक से आगे सामना होगा जिसको इग्नोर किया समय बदला बृजेश पाठक स्वास्थ्य मंत्री बने अमित मोहन प्रसाद वहीं डटे रहे सरकार के 100 दिन का कार्यकाल पूरा हुआ ट्रांसफर पॉलिसी में जमकर धांधली का अमित मोहन प्रसाद पर आरोप लगा। विभागीय मंत्री ने पत्र लिखा जांच कमेटी बनी सवाल उठे यह माहौल बन चुका था कि सुरक्षा चक्र मजबूत है लेकिन अमित मोहन हटा दिए गए। आराधना शुक्ला करीब 3 साल से माध्यमिक शिक्षा विभाग की मुखिया रहे इस बीच यूपी बोर्ड का पर्चा आउट हुआ निदेशक नप गए लेकिन उनकी कुर्सी सही सलामत रहे सरकार की दूसरी पारी में नई मंत्री से सामंजस्य गड़बड़ होने की चर्चाएं इस बीच उठने लगी अब उनका विभाग भी बदल दिया गया ढाई साल से उच्च शिक्षा में तैनात मोनिका यश दर्द भी नए महकमे में भेजी गई सहारनपुर व अलीगढ़ में बन रहे विश्वविद्यालयों के निर्माण में देरी पर पीएम ने हाल ही में नाराजगी व्यक्त की थी, जिसका कारण मोनिका यश गर्ग को भी विभाग से हटने का कारण बना। ऐसे तमाम अफसर जो सालों से एक ही कुर्सी पर जमे रहे और मनमानी तरीके से काम करते रहे बार-बार चित आने के बाद भी अब सर लापरवाही करते रहे जिसका परिणाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त प्रशासक के रूप में अफसरों को दिखाया।

 

मर्ज को नासूर बनने से पहले ही मुख्यमंत्री ने कर दिया इलाज

तबादलों की शुरुआत के साथ ही सरकार के 100 दिन की उपलब्धियों केसूर मध्यम पढ़ने लगे थे मंत्रियों अफसरों की खींचतान गड़बड़ियों के स्वर तेजी से मुखर होने लगे इसके बाद से ही सरकार को यह एहसास होने लगा था कि सख्त संदेश देना जरूरी है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अफसरों को किनारे किए जाने की वजह छवि व उनकी निष्ठा भी है हाल ही में कुछ प्रतिष्ठानों संस्थानों पर आयकर के छापे पड़े थे उसके तार भी कुछ अफसरों से जोड़े जा रहे थे 2 साल पहले मुख्यधारा में लौटे एक अफसर के पास जिम्मेदारियां तो यहां बेहतर परिणाम देने की थी लेकिन वह अपना भविष्य सुधारने के लिए कहीं और समन्वय करने में जुटे थे इसकी सूचना भी मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी थी इसलिए जितनी तेजी से वह व्यवस्था के नजदीक हुए थे उतनी ही फुर्ती से उन्हें दूर कर दिया गया। एक साथ दो नाव पर सवारी पड़ी भारी।

कुछ अफसरों के अच्छे दिन आ गए

एक तरफ जहां तबादलों की सूची में कुछ अफसरों को झटका दिया तो कुछ के अच्छे दिन भी लाए 1997 बैच के आईएएस अधिकारी श्री हरि ओम 5 साल बाद किसी अहम विभाग में लौटे हैं पहली बार योगी के सत्ता संभालने के 2 महीने बाद ही उन्हें सामान्य प्रशासन भेज दिया गया था तब से वह वही बने हुए हैं हरिओम 2005 से 2007 के बीच गोरखपुर के जिलाधिकारी थे और वहां हुए दंगों के बाद सस्पेंड भी किए गए थे इस दौरान योगी ने उनके तल्ख रिश्तो की चर्चा आम थी सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों हरिओम ने सीएम से मुलाकात की थी अब उन्हें समाज कल्याण विभाग दिया गया है पशुपालन विभाग से हटाकर कानपुर में कमिश्नर बनाए गए सुधीर 2 साल पहले राजस्व परिषद भेज दिए गए थे अब उनकी दोबारा वापसी हुई है। लंबे इंतजार के बाद इन दोनों अफसरों को पोस्टिंग मिल गई है अब अपना हुनर दिखाने को बेताब है यह दोनों अफसर।

सख्त प्रशासक के रूप में उभरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जल्द ही अभी और चेहरे बदलेंगे

ब्यूरोक्रेसी में हुए इस बदलाव मैं अभी विराम नहीं लगेगा जल्द ही अभी और कई ऐसे अफसर हैं जिनको साइड लाइन किया जाएगा और क्रीम पोस्टिंग के इंतजार का दिन गिन रहे कुछ अफसरों को मिलेगी पोस्टिंग, सूत्रों की माने तो सचिव व कमिश्नर स्तर पर अगले चरण में तबादले होंगे वहीं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से भी कुछ अफसरों को जल्द वापस बुलाने की कवायद चल रही है ऐसे में एक साथ कई महत्वपूर्ण विभाग पाने वाले कुछ अफसरों की भूमिका भी इसके साथ बदली जाएगी मौजूदा समय में अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव रैंक के 22 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं इनमें से कई अफसर ऐसे हैं जिन्हें केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर 5 साल से ज्यादा का वक्त हो गया है वहीं प्रदेश में उच्च स्तर पर अब भी जने कुछ अफसर भी गुरुवार के तबादलों के बाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अपनी फाइल फिर से पलटने में जुट गए हैं क्योंकि अब उन्हें भी असुरक्षा महसूस होने लगी है ऐसे में यह कहा जा रहा है कि लंबे समय से जमे अफसरों को जल्द ही साइडलाइन किया जाएगा उसकी आहट के बाद ही कई अफसर विकल्प तलाशने में जुट गए हैं।

कौन है संजय प्रसाद जो इतने बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल में अहम हो गए

2019 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे संजय प्रसाद, 3 साल से सीएम कार्यालय में ही है तैनात, अपने काम के बदौलत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे विश्वासपात्र और सीएम की नजर में कामकाजी अवसर साबित हुए

उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी व सत्ता के गलियारों में कल तक जितनी चर्चा अवनीश अवस्थी के भविष्य को लेकर हो रही थी आज उतनी ही चर्चा संजय प्रसाद को लेकर हो रही है 1995 बैच के आईएएस अफसर संजय प्रसाद को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के साथ ही गृह व सूचना विभाग का भी बॉस बना दिया गया है संजय प्रसाद के पास प्रमुख सचिव सूचना का पहले भी चार्ज था लेकिन उनके ऊपर नवनीत सहगल अपर मुख्य सचिव सूचना थे। पहले उन्हें ग्रह का अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने की चर्चा थी लेकिन जब तबादले की बड़ी सूची सामने आई तो उनको गृह विभाग के साथ-साथ सूचना विभाग का प्रमुख बना दिया गया । 1995 बैच के आईएएस अफसर संजय प्रसाद ने अपनी नौकरी की शुरुआत आजमगढ़ जनपद से की थी उन्हें असिस्टेंट मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनाती मिली थी यह संयोग है कि जिन अवनीश अवस्थी के विभाग उनके जिम में आए हैं वह उस समय आजमगढ़ के जिला अधिकारी हुआ करते थे 2017 में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो संजय प्रसाद केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर रक्षा विभाग में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण उस समय रक्षा मंत्री थी।
समय बदला 2019 में संजय प्रसाद की केंद्र से अपने मूल कैडर उत्तर प्रदेश में दोबारा वापसी हुई तब उन्हें सचिव इंडस्ट्री के पद पर तैनाती दी गई करीब 6 महीने तक इस पद पर रहने के बाद संजय प्रसाद को सचिव मुख्यमंत्री बना दिया गया। अपनी मेहनत और ईमानदारी की बदौलत तब से संजय प्रसाद वहीं तैनात है करीब 2 साल पहले जब नवनीत सहगल की नियुक्ति अपर मुख्य सचिव सूचना के तौर पर मुख्यधारा में वापसी हुई तो संजय प्रसाद को प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के साथ प्रमुख सचिव सूचना भी बना दिया गया संजय की गिनती सीएम के भरोसेमंद अफसरों में होती है अहम विभागों के साथ ही ग्रह की जिम्मेदारी इसका इशारा करता है क्योंकि कानून व्यवस्था सीएम की सर्वोच्च प्राथमिकता में है हालांकि सूचना व गृह जैसे अहम विभागों का एक सामान्य करना आसान नहीं है लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संजय प्रसाद पर भरोसा किया और उन्हें यह जिम्मेदारी दी। हालांकि संजय प्रसाद से पहले अवनीश अवस्थी ने भी कुछ दिनों तक अपर मुख्य सचिव गृह और सूचना का कामकाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्य के कार्यकाल के दौरान ही देख चुके हैं ऐसे में यह कहा जा रहा है कि अवनीश अवस्थी की तरह संजय प्रसाद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भरोसा जीतने में कामयाब रहेंगे और सूचना के साथ-साथ कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखेंगे।

2019 से लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के करीब रहने वाले उनके सबसे करीबी और विश्वासपात्र संजय प्रसाद के लिए भी डगर आसान नहीं है लेकिन देखना होगा की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बड़े भरोसे पर संजय प्रसाद कितने खरे उतरते हैं। विभागों की जिम्मेदारी के साथ साथ भरोसा जीतने की जिम्मेदारी भी उन पर बड़ी है ऐसे में इतने बड़े बड़े अक्षरों को साइड लाइन किए जाने के बाद संजय प्रसाद को मुख्यमंत्री ने इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है तो वह उसको पूरा करने की कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे लेकिन अब उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने संजय प्रसाद के कंधों पर दी है तो देखना होगा कि संजय प्रसाद उस पर कितने खरे साबित होते हैं।

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